पौड़ी। पहाड़ में औषधीय और खुशबूदार पौधों की खेती से समृद्धि का रास्ता खुलेगा। यह कहना है खुशबूदार पौधों की खेती पर काम कर रहे उत्तराखंड और गुजरात के वैज्ञानिकों का। मंडल मुख्यालय में औषधीय और सगंध पौधों की खेती एवं संग्रहण तकनीक पर मंगलवार से शुरू हुई कार्यशाला में वैज्ञानिकों ने कहा कि पहाड़ में इसकी खेती की असीम संभावनाएं है। इससे किसानों की आर्थिकी मजबूत कर पलायन को रोका जा सकता है।
पौड़ी में प्रसार प्रशिक्षण केंद्र में तीन दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ करते हुए उद्यान विभाग के संयुक्त निदेशक डा. रतन कुमार कहा कि औषधीय एवं सगंध पादपों की खेती को बढ़ावा देने के लिए सरकार की ओर से कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। किसान इन योजनाओं का लाभ उठाकर अपनी आर्थिकी मजबूत कर सकते हैं। मुख्य उद्यान अधिकारी डा. नरेंद्र कुमार ने कहा कि जड़ी बूटी की खेती पहाड़ से बढ़ते पलायन की समस्या को कम करने में वरदान साबित हो सकती है। आपदा के दौरान और जंगली जानवरों के द्वारा इसके नुकसान की संभावना भी कम रहती है। औषधीय एवं सगंध पादप केंद्र सेलाकुई के वैज्ञानिक सुनील शाह और गुजरात से आए वरिष्ठ वैज्ञानिक डा. परमेश्वर लाल सारन ने इसके संग्रहण की जानकारी दी। वैज्ञानिक सुनील शाह ने कहा कि कई बार उचित संग्रहण न होने से जड़ी बूटी के औषधीय गुण प्रभावित हो जाते हैं। उन्होंने धान, गन्ना और गेंहू की तर्ज पर जड़ी बूटियों का न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित करने पर भी जोर दिया। कार्यशाला का संचालन सहायक विकास अधिकारी पंकज स्वरूप रतूड़ी ने किया।