पौड़ी। सांस्कृतिक नगरी पौड़ी में शनिवार को संस्कृति भवन में हर दर्शक तब थिरक उठा, जब मंच पर एक सौ महिलाओं ने एक साथ ढोल-दमाऊं की घमक पर पांडव नृत्य किया। ठेठ ग्रामीण अंचल की पट्टी खातस्यूं की महिलाएं पहली बार किसी मंच पर पहुंची हैं, लेकिन उनका नृत्य अनुभवी कलाकारों को भी मात देता नजर आया।
गढ़कला सांस्कृतिक संस्थान की ओर से पट्टी खातस्यूं के श्रीकोट, गिठाली, क्यार्द व पातल आदि गांवों की महिलाओं को फरवरी में एक माह का नृत्य व लोक गायन का प्रशिक्षण रंगकर्मी विनोद श्रीकोटी के संरक्षण में दिया गया। शनिवार को गांवों से महिलाएं संस्कृति भवन पहुंचीं। पहाड़ के लोक गीतों पर उनका मौलिक लोक नृत्य व गीतों पर दर्शक एकटक निहारते रहे। थड्या, चौफला, मांगल, झुमैलो, मैती व चैती गीतों पर नृत्य ने पूरे माहौल को बांध दिया। कार्यक्रम के अंत में ढोल-दमांऊ की घमक के साथ एक सौ महिलाओं के एक साथ पांडव नृत्य ने तो दर्शकों को भी थिरकने पर मजबूर कर दिया। ढोल पर नागेंद्र व दमाऊं पर भक्ति लाल शाह ने भी दर्शकों को लुभाया। संचालक नवीन भट्ट भी ठेठ पहाड़ी अंदाज में दर्शकों को बारीकियां बताते रहे। कार्यक्रम में गढ़कला सांस्कृतिक संस्था के अध्यक्ष त्रिभुवन उनियाल, लोक कलाकार अनिल बिष्ट, गणेश वीरान, संगीता रावत व रजनी आदि मौजूद रहीं।