श्रीनगर। गढ़वाल विवि की परीक्षा प्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में हैं। यहां कुछ छात्रों की उत्तर पुस्तिकाओं की स्क्रूटनी किए जाने पर प्राप्तांकों में तीन गुना तक वृद्धि होने का मामला सामने आया है। विवि प्रशासन का कहना है कि मूल्यांकन के दौरान त्रुटि हुई थी जिसे सुधारा गया है। उधर, छात्रों ने कहा पहले कम नंबर दिए गए और फिर तीन गुना नंबर बढ़ा दिए गए। यह विवि की लापरवाही को दर्शाता है।
गढ़वाल विवि में उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे हैं। शिक्षा सत्र 2017-18 की सेमेस्टर परीक्षा के मूल्यांकन से असंतुष्ट करीब 15 छात्रों ने सूचना अधिकार के तहत अपनी उत्तर पुस्तिकाएं मांगी थी। सूचना अधिकार के तहत उत्तर पुस्तिका देखे जाने पर मूल्यांकन छूट जाने व अंकों के योग में त्रुटि की पुष्टि होने पर विवि ने उक्त उत्तर पुस्तिकाओं की दुबारा जांच कराई। इस जांच में कुछ छात्रों के प्राप्तांकों में तीन गुना वृद्धि हुई है। बीएससी छठवें सेमेस्टर के एक छात्र की वनस्पति विज्ञान विषय में करीब तीन गुना अंकों की वृद्धि हुई है। उक्त छात्र को पहले इस प्रश्न पत्र में 19 नंबर मिले थे, लेकिन दुबारा जांच कराने के बाद बढ़ कर 49 हो गए। वहीं बीएससी तृतीय सेमेस्टर के एक छात्र की गणित विषय में 30 से बढ़कर 41 अंक हुए हैं। बीकाम द्वितीय सेमेस्टर के एक छात्र के हिंदी भाषा में 10 से बढ़ कर 27 अंक हुए हैं। छात्रों ने मूल्यांकन में इस प्रकार की लापरवाही पर कड़ा आक्रोश जताया है।
- कुछ छात्रों ने आरटीआई के तहत उत्तर पुस्तिकाएं मांगी थी। इनमें मूल्यांकन के दौरान त्रुटि स्पष्ट हुई थी, जिसे सुधारा गया है। किसी भी उत्तर पुस्तिका का पुर्नमूल्याकंन नहीं किया गया है। - प्रो. आरसी भट्ट, परीक्षा नियंत्रक गढ़वाल विवि।
र्न देर से मिलने के कारण फाइल देर से भेजी गई है।