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प्रशासन की संयुक्त टीम ने जांची नमामि गंगे के तहत बने स्नान घाटों की गुणवता

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देवप्रयाग। पालिका क्षेत्र देवप्रयाग में अलकनंदा व भागीरथी नदी तटों पर बनाए गए स्नान घाटों के निर्माण में बड़ी अनियमितता पाई गई है। जांच टीम ने रिपोर्ट तैयार कर एसडीएम कीर्तिनगर को सौंप दी है।
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नमामि गंगे परियोजना के तहत संगम नगरी में गंगा, भागीरथी व अलकनंदा नदी तटों पर करीब तीन करोड़ 84 लाख की लागत से स्नान घाटों का निर्माण किया है, लेकिन कार्यदायी एजेंसी की ओर से कार्यों की गुणवत्ता को ध्यान में नहीं रखा गया है। प्रशासन के निर्देश पर तहसीलदार अवतार सिंह बुटोला की अध्यक्षता में गठित टीम ने निर्माण कार्यों की गुणवत्ता का निरीक्षण किया। तहसीलदार ने बताया कि सभी स्नान घाटों के निर्माण कार्यों में लापरवाही बरती गई है। संगम स्थल पर बने श्मशान घाट की सीढ़ियों पर आधी अधूरी टाइल्स बिछाई गई है, जोकि लगातार टूट रही है। शौचालय के पिट का निर्माण मानकों के अनुसार न किए जाने पर गंदगी ओवर फ्लो होकर गंगा में गिर रही है। भरत स्नान घाट में महिलाओं को वस्त्र बदलने के लिए बनाए गए कमरे पर दरवाजा नहीं लगाया गया है। रामकुंड स्नान घाट पर जंक लगी रेलिंग के पीलर मानकों के अनुरूप नहीं बनाए गए है, पुरानी धर्मशाला की ओर रेलिंग व शौचालयों में पानी की व्यवस्था नहीं की गई है। जबकि श्मशान घाट पर टोडेश्वर महादेव की ओर से सुरक्षा दीवार नहीं बनाई गई है, जिससे घाट नदी से आए मलबे में दब सकता है। तहसीलदार ने बताया की निर्माण कार्यों में पाई गई खामियों की रिपोर्ट तैयार कर एसडीएम कीर्तिनगर को सौंप दी गई है। जांच टीम में पालिका के अधिशासी अधिकारी बीएस बिष्ट, जल संस्थान के सहायक अभियंता जीसी भट्ट शामिल थे।
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