श्रीनगर। जंगलों की आग सेहत पर बुरा असर डालने लगी है। लोगों को आंख और त्वचा में जलन की शिकायत होने लगी है। अस्पतालों में खांसी-जुखाम, बुखार और सांस संबंधी रोगियों की संख्या में 30 फीसदी बढ़ोतरी हो गई है। चिकित्सक इसे बहुत ही खतरनाक स्थिति मान रहे हैं। उनका कहना है कि सड़क निर्माण की धूल और धुआं मिलकर सेहत को नुकसान पहुंचा रहे हैं।
इन दिनों अलकनंदा घाटी में जंगल आग की चपेट में हैं। जंगलों की आग से विजीबिलिटी लगभग शून्य हो गई है। वहीं जले हुए पेड़-पौधों की राख उड़कर बस्ती तक पहुंच रही है। राजकीय संयुक्त अस्पताल श्रीनगर के वरिष्ठ शल्य चिकित्सक डा. लोकेश सलूजा के अनुसार, आग सेहत पर बुरा असर डाल रही है। यह आग बच्चों और बीमारों के लिए बहुत खतरनाक है। दमा रोगियों को सांस लेने में दिक्कत हो रही है। राख सांस के जरिए श्वास नली में पहुंच रही है। उन्होंने बताया कि सामान्यता इस मौसम में खांसी-जुकाम के मरीज कम आते हैं, लेकिन जब से आग लगी है ऐसे रोगी 30 फीसदी बढ़ गए हैं। उन्होंने बताया कि राख हवा में खतरनाक तो है ही, पानी को भी यह प्रदूषित कर रही है। पानी के साथ मिलकर यह टायफाइड या अन्य विकार पैदा करेगी। आग से आंख और त्वचा में एलर्जी की दिक्कत हो सकती है।