श्रीनगर। गढ़वाल विवि के हैप्रेक संस्थान में औषधीय एवं सगंध पादप कार्यक्रम के तहत कृषिकरण से संरक्षण तक विषय पर दो दिवसीय किसान गोष्ठी का शुभारंभ किया गया, जिसमें पांच वर्षों से उत्कृष्ट कार्य करने वाले प्रदेश के विभिन्न जनपदों से पहुंचे काश्तकारों को सम्मानित किया गया।
मंगलवार को गढ़वाल विवि के हैप्रेक संस्थान में हर्वल रिसर्च डेपलपमेंट इंस्टीट्यूट के निदेशक डा. चंद्रशेखर सनवाल, आईक्यूएसी के निदेशक डा. ओपी गुसांई, क्षेत्रीय आयुर्वेदिक शोध केंद्र के निदेशक डा. एमएस रावत, डा. एआर नौटियाल व डा. एमसी नौटियाल ने गोष्ठी का शुभारंभ किया। इसमें मौजूद किसानों को उच्च हिमालयी क्षेत्रों में पाई जाने वाले औषधीय पौधों जैसे जटामांसी, अतीस, वनककडी आदि के कृषिकरण तकनीक, व्यवसायीकरण के बारे में जानकारी दी गई। साथ ही इन औषधीय पौधों के अत्यधिक दोहन से हो रहे विलुप्तीकरण के प्रति जागरूक भी किया गया। वक्ताओं ने कहा कि संस्थान पिछले 30-35 वर्षों से उच्च हिमालयी जड़ी बूटियों के संरक्षण एवं कृषिकरण पर कार्य कर रहा है। जिसका मुख्य उद्देश्य काश्तकारों को औषधीय पौधों के कृषिकरण से रोगार से जोड़ना है। ताकि पहाड़ी क्षेत्रों से रोजगार के लिए हो रहे पलायन को रोका जा सके। इस मौके पर विगत पांच वर्षों से उत्कृष्ट कार्य करने वाले चमोली जिले के घाट क्षेत्र की रुकमा देवी, देवाल के पान सिंह, बागेश्वर की कलावती देवी, उत्तरकाशी की इंद्रमणी देवी, पौड़ी के रामकृष्ण वैद्य व जनपद चमोली के घेस क्षेत्र के केशर सिंह बिष्ट को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।