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एएचपीसीएल ने 90 कर्मचारियों को किया सेवामुक्त

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श्रीनगर। जीवीके/अलकनंदा हाईड्रो पावर कंपनी लि. (एएचपीसीएल) ने अपने 90 कर्मचारियों की सेवा समाप्त कर दी है। कंपनी ने नोटिस जारी करते हुए उक्त कर्मचारियों के खाते में फुल एंड फाइनल भुगतान कर दिया है। कंपनी का कहना है कि इन कर्मचारियों को पिछले 4 साल से बिना काम के वेतन दिया जा रहा था। वहीं, कर्मचारियों ने सेवा समाप्ति पर आक्रोश जताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि बिना पूर्व सूचना के उनको हटाया गया है।
श्रीनगर जल विद्युत परियोजना का संचालन कर रही जीवीके/एएचपीसीएल ने कर्मचारियों की छंटनी कर दी है। कंपनी ने गत दिवस 90 कर्मचारियों के खाते में एक माह का नोटिस पे, ग्रच्युटी, अर्जित वेतन व छुट्टी का नकदीकरण समेत समस्त भुगतान भेज दिया। देर शाम इस संबंध में कंपनी की ओर से नोटिस भी चस्पा कर दिया गया।
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नोटिस के अनुसार, अवर अभियंता, सुपरवाइजर, ट्रेनी इंजीनियर जियोलॉजिस्ट, सर्वेयर व मिनिस्ट्रीयल स्टाफ की सेवा समाप्त की गई है। इसमें लिखा गया है कि परियोजना में कुछ भी काम न होने और बेकार बैठे होने के बावजूद प्रबंधन उनको जून 2015 से वेतन दे रहा था। सेवा से हटाए गए कर्मचारियों को काम पर न आने को कहा गया है।
वहीं, कंपनी के इस कदम पर सेवा मुक्त कर्मचारियों ने रोष जताया है। उन्होंने प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री सहित अधिकारियों को ज्ञापन भेजते हुए कहा कि परियोजना में उनकी भूमि को अधिग्रहीत किया गया है। उनके साथ 58 साल तक रोजगार प्रदान करने का अनुबंध शासन-प्रशासन की उपस्थिति में किया गया था। कंपनी ने अनुबंध की शर्तों को तोड़ा है।
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आचार संहिता का समय चुना
श्रीनगर। पूर्व में भी एचपीसीएल अनुशासनहीनता के आरोप में 14 कर्मचारियों को सेवामुक्त कर चुकी है। तब इस मामले में काफी हंगामा हुआ था। तीन कर्मचारी परियोजना की मिक्सर मशीन के टावर में चढ़ गए थे। शायद यही वजह है कि कंपनी ने कर्मचारियों को हटाने के लिए आदर्श चुनाव आचार संहिता का समय चुना। ताकि कर्मचारी धरना-प्रदर्शन न कर सके।
हेड ऑफिस से कर्मचारियों को सेवामुक्त किया गया है। उनको नोटिस भी भेजे गए हैं। एके सिंह, डीजीएम मानव संसाधन विभाग,एएचपीसीएल
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