कदम कदम बढाए जा, खुशी के गीत गाए जा, ये जिंदगी है कौम की, कौम पर लुटाए जा।
इन पंक्तियों के साथ सशस्त्र सीमा बल के 108 सहायक सेनानायकों ने अंतिम पग पार कर देश सेवा के क्षेत्र में पहला कदम रखा।
शुक्रवार को एसएसबी अकादमिक परिसर में सहायक सेनानायकों की दीक्षांत परेड (पासिंग आउट परेड) में देश के विभिन्न क्षेत्रों के 108 प्रशिक्षु सहायक सेनानायकों ने देश सेवा की शपथ ली।
दीक्षांत परेड की सलामी मुख्य अतिथि केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने ली।
दीक्षांत समारोह 11 बजे पूर्वाह्न शुरू हुआ। पौने बारह बजे मुख्य अतिथि कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे। इसके बाद परेड स्थल पर राष्ट्रध्वज और एसएसबी का ध्वज लाया गया।
12 बजे सेनानायक संजय कुमार ने सहायक सेनानायकों को देश सेवा की शपथ दिलाई। बाद में मुख्य अतिथि ने परेड की सलामी ली। महानिदेशक एसएसबी वंशीधर शर्मा ने एसएसबी के इतिहास पर प्रकाश डाला।
कहा के एसएसबी को वर्ष 2001 में भारत नेपाल सीमा की 1751 किमी और वर्ष 2004 में भारत भूटान की 699 किमी सीमा की सुरक्षा की जिम्मेदारी दी गई।
निदेशक एस बंदोपाध्याय ने कहा कि 4 महिला अधिकारियों समेत 83 प्रशिक्षु अधिकारी सीधी भर्ती से है। जबकि 25 प्रशिक्षु अधिकारी विभागीय प्रतियोगिता से हैं।
इनको क्रमश 50 सप्ताह और 28 सप्ताह का गहन प्रशिक्षण दिया गया है। मुख्य अतिथि केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने विभिन्न क्षेत्रों में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले सहायक सेनानायकों को पुरस्कृत भी किया।
इस दौरान पूर्व मुख्यमंत्री डा. रमेश पोखरियाल निशंक, प्रशिक्षु अधिकारियों के परिजन, गढ़वाल आयुक्त सीएच नपलच्याल, आईजी गढ़वाल संजय गुंज्याल, डीएम चंद्रशेखर भट्ट, एसपी अजय जोशी आदि मौजूद थे।