श्रीनगर। शहर में पासपोर्ट सेवा केंद्र खुलने के बाद आवेदकों की मुश्किलें कम होने के बजाय बढ़ गईं हैं। जहां पहले आवेदकों को एक-डेढ़ माह के अंदर पासपोर्ट मिल जाते थे, वहीं, अब तीन माह बीतने के बाद भी पासपोर्ट नहीं बन पा रहे हैं।
केंद्र सरकार की योजना के अनुसार पासपोर्ट विभाग और डाक विभाग मिलकर पासपोर्ट सेवा केंद्र खोले जा रहे हैं। सरकार के निर्णय अनुसार हर 50 किलोमीटर पर केंद्र खुलने हैं। उत्तराखंड में क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय देहरादून के अधीन अब तक छह केंद्र नैनीताल, काठगोदाम, रुद्रपुर, अल्मोड़ा, रुड़की व श्रीनगर पासपोर्ट सेवा केंद्र खुल चुके हैं। श्रीनगर में 17 मई 2018 से केंद्र ने काम करना शुरू किया।
भाकपा (माले) नेता इंद्रेश मैखुरी का कहना है कि उद्घाटन के समय दावा किया गया था कि गढ़वाल के केंद्र बिंदु श्रीनगर में केंद्र शुरू होने से पौड़ी, टिहरी, रुद्रप्रयाग व चमोली के निवासियों को लाभ मिलेगा। लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ।
प्रदेश में छह स्थानों में सेवा केंद्र खुलने के बाद क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय देहरादून से कर्मचारियों की वहां तैनाती की गई है। जिससे क्षेत्रीय कार्यालय में छह कर्मचारियों की कमी हो गई। इसी वजह से समस्या उत्पन्न हुई है।
पासपोर्ट सेवा केंद्र में तैनात जूनियर पासपोर्ट सहायक संजीव चौहान ने अधिकारियों की इजाजत के बिना कुछ बताने से इंकार किया है। वहीं जब देहरादून कार्यालय के नंबर पर संपर्क किया गया, तो फोन रिसीव नहीं हुआ। अधिकारियों का पक्ष मिलने के बाद प्रकाशित कर दिया जाएगा।