अकेले जिंदगी जी रहे बुजुर्ग धर्मनगरी हरिद्वार में सुरक्षित नहीं है। रिटायर्ड महिला होमगार्ड मुन्नी तिवारी की हत्या से एक बार फिर हरिद्वार पुलिस के दावे की पोल खुलकर सामने आ गई है। सवाल यही आ खड़ा हुआ है कि, बुजुर्गों की सुरक्षा भला कैसे हो सकती है।
गंगा तट अंतिम सांस लेने की चाह लेकर कई बुजुर्ग अपना घर बार छोड़कर यहां चले आते हैं। उत्तरी हरिद्वार, कनखल एवं मुख्य हरिद्वार में रहकर यह बुजुर्ग अध्यात्म में डूबे रहते हैं। इन बुजुर्ग की सुरक्षा के इंतजाम जरा भी नहीं है। डीजीपी रहे आईपीएस सुभाष जोशी ने बुजुर्गों की सेवा के लिए सराहनीय प्रयास किए थे पर उनके डीजीपी पद से हटते ही पुलिस की व्यवस्था अपने ढर्रे पर आ गई।
शिवालिक नगर जैसी जगह में घर में घुसकर महिला होमगार्ड की गला दबाकर हत्या कर देने की वारदात ने पुलिस सुरक्षा व्यवस्था की धज्जियां उड़ाकर रख दी है। ये आलम तब है जब बुजुर्ग का घर मुख्य सड़क पर ही है। महिला होमगार्ड हत्याकांड से कुंभनगरी में अकेले रह रहे बुजुर्गों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर से बहस छिड़ गई है।
हम बुजुर्गों से संपर्क बनाए रखने की पूरी कोशिश करते हैं। जो बुजुर्ग अकेले रहते है यदि वे संपर्क करते है तो पुलिस उनकी मदद को तत्पर रहती है। मृतका की बेटी भी आती जाती रहती थी और वो खुद होमगार्ड में रह चुकी थी। इसलिए कभी पुलिस से किसी तरह की मदद नहीं मांगी थी।
- सेंथिल अबूदई कृष्णराज एस, एसएसपी हरिद्वार
बुजुर्गों की हत्या की कुछ घटनाएं
- वर्ष 2008 में उत्तरी हरिद्वार के अमृत गंगा अपार्टमेंट दिल्ली के रिटायर्ड बिजली विभाग के कर्मचारी जगदीश चंद्र की हत्या।
- वर्ष 2010 में कनखल के गणेशपुर में दिल्ली के बुजुर्ग दंपति की हत्या।
- वर्ष 2009 में ज्वालापुर के गांव सीतापुर में रिटायर्ड सैन्य अफसर शशिबाला चौहान और उनके पति विजय चौहान की हत्या।
- वर्ष 2012 में श्यामपुर क्षेत्र में जंगल में बुजुर्ग दंपति की हत्या का मामला।