अगर आप उत्तराखंड में किसी ऐसी जगह पर हैं जहां एंबुलेंस पहुंचने में दिक्कत होती है तो आपके लिए एक खुशखबरी है। उत्तराखंड विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद ने ऐसी एंबुलेंस बनाई है जो किसी भी दूर दराज की जगह आराम से पहुंच सकती है।
साढ़े सात किलो की डोली नुमा आरामदेह एंबुलेंस इन गांवों से मरीजों को आसानी से अस्पताल तक पहुंचा देगी। भार कम होने से लोग इसे कांधे पर रखकर हल्की दौड़ भी लगा सकते हैं।
इसमें आक्सीजन सिलेंडर, फर्स्ट ऐड बॉक्स और जरूरी दवाएं उपलब्ध रहेंगी। इसकी कीमत सात सौ से एक हजार रुपये के बीच है।
उत्तराखंड विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (यूकास्ट) ने देहरादून इंस्टीट्यूट आफ टेक्नोलोजी (डीआईटी) से कांधों पर ले जाने वाली यह विशेष एंबुलेंस तैयार करवाई है।
इसे इंस्टीट्यूट के कुलपति प्रोफेसर कृष्ण कुमार की अगुवाई में मेकेनिकल इंजीनियरों की टीम ने इसे तैयार किया है। इसे बनाने में एक साल लगा। प्रोफेसर कुमार ने बताया कि ‘हॉलो ट्युबलर’ संरचना की डोलीनुमा इस एंबुलेंस को माइल्ड स्टील से तैयार किया गया है।
आराम कुर्सी की तरह इसकी सीट कैनवस से तैयार की गई है। इसमें एक व्यक्ति आराम से ले जाया जा सकता है।
पर्वतीय और दुर्गम स्थानों को ध्यान में रखकर इसे तैयार किया गया। सबसे बड़ी विशेषता इसका साढ़े सात किलो वजन है। उन्होंने बताया कि अगर इसे अधिक संख्या में तैयार करवा जाएगा तो सात सौ रुपये कीमत आएगी।
अधिकतम कीमत एक हजार रुपये तक जा सकती है।
इसमें विशेष पैडिंग लगी है, जिससे ले जाने वालों को दिक्कत न हो। यूकास्ट के विज्ञानी डा. डीपी उनियाल ने बताया कि इसका इस्तेमाल 108 एंबुलेंस सेवा में भी किया जाएगा। यूकास्ट इसे पेटेंट करा रहा है।