केंद्र सरकार के निर्देश पर तीन जून को उत्तराखंड के गोपेश्वर से बाड़ाहोती गई 19 सदस्यीय प्रशासनिक टीम आठ जून को लौट आई है। टीम ने रिपोर्ट खुफिया विभाग और शासन को सौंप दी है।
रिपोर्ट के मुताबिक टीम ने चमोली जिले से सटी चीन सीमा की रेकी की। पाया कि वहां सब कुछ ठीक-ठाक है। बाड़ाहोती में नो-मैन्स लैंड के इर्द-गिर्द चीन की ओर से सैन्य गतिविधियां नहीं दिखीं।
रेकी करने गई टीम को भारत-चीन सीमा पर चीनी याक टहलते हुए मिले। भारतीय फौज रिमखिम नामक स्थान पर बर्फ के बावजूद मजबूती से डटी है।
इस बार लद्दाख बॉर्डर पर चीनी गतिविधियों को देखते हुए भारतीय सेना ने अपर रिमखिम में सेना चौकियों के समीप हेलीपैड भी बनाया है।
चमोली जिले के चरवाहे भी अपनी सैकड़ों बकरियों को लेकर सीमा के पास मलारी से आगे पहुंच गए हैं। जो शीघ्र ही नो मैन्स लैंड के बुग्याल तक पहुंच जाएंगे।
ये चरवाहे भारतीय सेना के लिए मजबूत सूचना तंत्र का कार्य करते हैं। प्रशासनिक टीम ने सीमा क्षेत्र के लिए पिछले कई सालों से निर्माणाधीन मलारी-सुमना मोटर मार्ग की धीमी प्रगति पर असंतोष जताया है।
सड़क निर्माण का जिम्मा सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) के पास है। पिछले चार सालों में सड़क का निर्माण सिर्फ 24 किमी ही हुआ है।
बाड़ाहोती पर भी है ड्रैगन की नजर
इस बार जब लद्दाख में चीन की हरकत बढ़ी, तब बाड़ाहोती पर भी ड्रैगन की नजर थी। लेकिन फिलहाल सब ठीक-ठाक है। वर्ष 1959 में चीन ने यहां की सीमा पर भी हरकत शुरू कर दी थी।
भारत और तिब्बत व्यापार की सबसे बड़ी मंडी बाड़ाहोती को भी चीन अपनी सीमा बताने का हमेशा प्रयास करता है। बाड़ाहोती बुग्याल की दूरी 10 किमी से अधिक है।