राष्ट्रीय महिला आयोग की सदस्य सुषमा साहू शुद्धोवाला जेल का निरीक्षण करने पहुंची।
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राष्ट्रीय महिला आयोग ने देहरादून स्थित जेल में महिलाओं की दुर्दशा पर कड़ी नाराजगी जताई है। 20 महिलाओं के क्षमता वाले बैरक में 80 महिलाओं को देख आयोग की सदस्य बिफर गईं। उन्होंने जेल अधीक्षक से महिलाओं के रहने की पर्याप्त व्यवस्था करने को कहा। वहीं, नारी निकेतन में बिना सूचना के पहुंची आयोग की सदस्य को देख सभी चौंक गए। इन्होंने यहां गंदगी पर कड़ी नाराजगी जताई। प्रोबेशन अधिकारी और कर्मचारियों के अलग-अलग जवाब सुनकर उन्होंने कहा कि पहले पर्याप्त जानकारी जुटा लें।
शुक्रवार को दोपहर तीन बजे राष्ट्रीय महिला आयोग की सदस्य सुषमा साहू सुद्धोवाला स्थित जेल पहुंची। यहां उन्होंने महिला बंदियों की स्थिति देखी। 20 बैरक वाली क्षमता में 80 महिलाओं को ठूसा देख उन्होंने नाराजगी जताई। कहा कि बेहद दुख की बात है कि पुरुष प्रधान समाज में महिलाओं की आज भी यही स्थिति है। इसके बाद उन्होंने वहां प्रशिक्षण की व्यवस्था देखी।
महिलाओं के लिए कोई ट्रेनिंग प्रोग्राम नहीं होने पर सुषमा ने आश्चर्य जताया। उन्होंने कहा कि यह महिलाएं कैसे सुधरेंगी। बाहर जाकर जब इन्हें पैसे की जरूरत पड़ेगी तो यह कैसे कमाएंगी और फिर कुछ गलत काम करेंगी। उन्होंने जेल अधीक्षक से इस संबंध में कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने बताया कि सरकार को इस संबंध में प्रस्ताव बनाकर भेजा है। सुषमा ने उसकी कॉपी उपलब्ध कराने को कहा और केंद्र से भी महिलाओं के लिए प्रयास किए जाने का भरोसा दिया।
बिना सूचना पहुंच गईं नारी निकेतन, सामने आया सच
नारी निकेतन देहरादून
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सुद्धोवाला जेल से बिना सूचना दिए राष्ट्रीय महिला आयोग की सदस्य सुषमा साहू सीधे नारी निकेतन पहुंच गईं। शाम पांच बजे जैसे ही वह नारी निकेतन पहुंचीं किसी की समझ नहीं आया कि क्या करें। उनके साथ प्रोबेशन अधिकारी मीना बिष्ट भी थीं। सुषमा सीधे उस कमरे में गईं जहां संवासिनियां अगरबत्ती बना रही थीं।
सुषमा ने बताया कि जहां अगरबत्ती की खुशबू आनी चाहिए थी, वहां इतनी बदबू थी कि खड़ा नहीं हुआ जा रहा था। संवासिनियों के कपड़े बेहद मैले थे। इस बारे में मीना बिष्ट से पूछा तो उनका जवाब था कि सरकारी खर्च से संवासिनियों के कपड़े बनाए जाते हैं। जबकि वहां खड़े एक कर्मचारी से यह सवाल किया तो उसका जवाब था कि कपड़े बनवाए नहीं जाते, बल्कि लोग दान करते हैं। इस पर प्रोबेशन अधिकारी का झूठ पकड़ में आ गया।
उन्होंने वहां स्थायी अधीक्षिका नहीं होने पर नाराजगी जताई। जब एक शिक्षिका से संवासिनियों के बारे में जानकारी लेनी चाही तो उन्होंने कहा कि रजिस्टर देख कर बताती हूं। यह सुन राष्ट्रीय महिला आयोग की सदस्य को गुस्सा आ गया। उन्होंने प्रोबेशन अधिकारी को फटकार लगाई और कहा कि संवासिनियों की स्थिति बेहद दयनीय है। बिना सूचना के मैं इसलिए ही आई थी ताकि किसी भी तैयारी का आप लोगों को समय न मिले। सुषमा ने बताया कि जिस तरह से वहां सब अलग-अलग जवाब दे रहे थे, उससे साफ लग रहा था कि यह सच नहीं बताना चाहते।