सरोवर नगरी नैनीताल में इन दिनों तेजी से बढ़ रही ठंड का असर न केवल यहां के जनमानस पर बल्कि पशु-पक्षियों पर भी पड़ने लगा है।
ठंड की वजह से नगर के प्रमुख दर्शनीय स्थल पंडित गोविंद बल्लभ पंत उच्च स्थलीय प्राणि उद्यान (चिड़ियाघर) में विद्यमान विभिन्न प्रजातियों के पक्षियों के साथ ही रेड पांडा, भालू समेत अन्य वन्य प्राणियों का मीनू बदल दिया गया है।
बता दें चिड़ियाघर में वन्य प्राणियों की कुल संख्या 250 है। जिसमें विभिन्न प्रजातियों के 170 से ज्यादा पक्षी हैं। सामान्य आहार के रूप में उन्हें एग्रोफीड यानी चारे का मिश्रण, हरी सब्जियां, लहसुन व प्याज आदि दिया जाता है। लेकिन अब सुबह-शाम तेजी से बढ़ रही ठंड की वजह से उनके मीनू में परिवर्तन कर दिया गया है।
पक्षियों को अब सामान्य आहार के साथ उबले अंडों का चूरा खिलाया जा रहा है तो हिमालयन भालुओं को सुबह के नाश्ते और लंच में खीर, सब्जी औैर फल तथा डिनर में जौ की रोटियां तथा तथा दूध के साथ गुड़ व शहद दिया जा रहा है।
ऐसा इसलिए क्यों कि शहद, गुड़ व अंडे की तासीर गर्म होती है और उनके सेवन से शरीर को अतिरिक्त ऊर्जा मिलती है। इसके अलावा रेड पांडा को उसके प्रिय भोजन रिंगाल के साथ ही केला, मौसमी फल, दूध, अंडे के साथ शहद दिया जा रहा है।
पक्षियों को ठंड से बचाने के जू प्रबंधन ने हर बाड़े के भीतर बल्ब भी लगाए हैं ताकि बिजली से निकलने वाली गर्मी पक्षियों को राहत दे सके। इसके अलावा रेड पांडा व बाघ के पिंजरों में वारमैक्स की सुविधा मुहैया करायी गई है।
जू में इन दिनों सोनम के बच्चे यहां भ्रमण पर आने वाले देशी-विदेशी सैलानियों के विशेष आकर्षण का केंद्र बने हैं। बता दें दार्जिलिंग जू से 25 नवंबर 2014 को सोनम व राहुल नामक दो रेड पांडा को नैनीताल जू में लाया गया था।
22 जून 2015 को सोनम ने दो नवजात बच्चों को जन्म दिया। यह दोनों बच्चे अब करीब 6 माह के हो गए हैं। बेहद प्यारे व सुंदर नजर आने वाले यह दोनों बच्चे इन दिनों जू में आने वाले हर सैलानी का विशेष आकर्षण बने हैं।
वन क्षेत्राधिकारी मनोज कुमार साह की मानें तो जू में इन बच्चों को देखने के लिए सैलानियों के साथ ही उनके बच्चों में बेहद उत्सुकता रहती है। बच्चे काफी देर तक उन्हें निहारते रहते हैं तथा उनकी फोटो लेने के लिए उत्सुक रहते हैं।
जू निदेशक डा. तेजस्विनी अरविंद पाटिल बताती हैं कि हर वर्ष जाड़ों में पशु-पक्षियों के आहार में बदलाव करना पड़ता है। करीब फरवरी अंत तक यह स्थित बनी रहेगी। फिलहाल जू में मौजूद अधिकांश पशु पक्षी उच्च स्थलीय प्रकृति के हैं लिहाजा उन पर ठंड का कम असर होता है।
वन क्षेत्राधिकारी मनोज साह, पशु चिकित्सक डा. एलके सनवाल व डा. योगेश भारद्वाज टीम के साथ हर रोज नियमित रूप से हर बाड़े का बारीकी से निरीक्षण कर चिकित्सकीय परीक्षण करते हैं ताकि किसी भी वन्य प्राणि को कोई परेशानी ना हो।