चंपावत में इन हादसों ने रुलाया
- चंपावत जिले में इस साल 29 छोटे-बड़े सड़क हादसे हुए जिनमें 15 लोगों की मौत हो गई और 59 यात्री चोटिल हुए। पांच मार्च को दुधौरी में एक जीप के खाई में गिरने से चालक सहित चार ग्रामीणों की मौत। इस घटना के सिर्फ 18 दिन बाद ही 23 मार्च को ठुलीगाड़ में बस से कुचलकर पांच श्रद्धालुओं की जान चली गई। 19 जून को रीठा साहिब गुरुद्वारे से पंजाब लौट रही बस के धौन में दुर्घटनाग्रस्त होने से 34 तीर्थयात्री घायल हो गए। रोडवेज बस की खराब फिटनेस से जिले में इस साल 39 बस ने बीच रास्ते में दगा दिया। इस घटना में किसी तरह यात्रियों की जान बची।
- चंपावत जिले में इस साल पांच लोगों की हत्याएं हुईं। 17 जनवरी में पाटी में बरात में पिटाई से पूर्व ग्राम प्रधान पुष्कर सिंह पाटनी की मौत हो गई थी। उसी माह टनकपुर में रेलवे ट्रैक के पास भोजीपुरा की एक युवती का शव मिला। चार फरवरी को रीठा साहिब के पास वारसी में स्वामी ध्यान योगी ने खुद को तमंचे से उड़ा जान दे दी। पांच मार्च को बाराकोट के सिमलटुकरा में ग्रामीण मदन सिंह की हत्या हुई। 14 मार्च को टनकपुर के बिचई गांव में बुजुर्ग भागीरथी देवी की हत्या हुई। 17 मई को चंपावत के पास के गांव में प्रेम प्रसंग में कथावाचक ने गला घोंटकर अनु. जाति वर्ग की युवती की हत्या।
- सूखीढांग के पास गजार के जंगल में दो जुलाई को हुई वारदात में भोजनमाता चंद्रावती (39) की जान चली गई। इसके अलावा बाघ और तेंदुए ने जिले में 31 लोगों को जख्मी किया। तेंदुए के खौफ से पिंजरा लगने से लेकर गश्त बढ़ाने के अलावा दो माह तक एनएच पर रात में दोपहिये वाहनों की आवाजाही पर रोक लगा दी गई। इसके अलावा टनकपुर क्षेत्र में 26 दिसंबर को जंगल में घास लेने गई गीता देवी पर बाघ ने दो बार हमला कर गंभीर रूप से घायल कर दिया। महिला के साथ गईं उसकी साथी जानकी देवी और पार्वती देवी ने हिम्मत दिखाते हुए गीता देवी की जान बचाई।
मलबे ने किया परेशान
आपदा से इस साल एक मौत हुई लेकिन उससे भी अधिक दिक्कत मार्ग बंद होने की रही। टनकपुर से पूर्णागिरि धाम जाने वाली सड़क बाटनागाड़ नाले में छह मीटर तक आए मलबे से 17 दिन तक बंद रही। सड़क को खोलने के लिए प्रशासन को मशक्कत करनी पड़ी थी।