हल्द्वानी। अप्रैल में गर्मी बढ़ने के साथ जंगल धधकने लगे हैं। आग से बचाव के तमाम दावे करने वाला वन विभाग आग धरातल पर खरा नहीं उतर पा रहा है। रानीबाग के जंगल में लगी आग पर काबू पाने में वनकर्मी सीमा विवाद में उलझ गए। इसे देखते हुए उप वन संरक्षक नैनीताल वन प्रभाग ने स्पष्ट आदेश जारी किया है। कहा कि वनाग्नि पर नजदीकी क्रू स्टेशन के कर्मी पहुंचेंगे। इसके बाद अन्य क्रू स्टेशन के कर्मचारी करेंगे।
वन विभाग ने फायर सीजन से पहले आग बुझाने के लिए जमकर मॉक ड्रिल की लेकिन घटना होने पर विभागीय सामंजस्य नजर नहीं आ रहा है। चार दिन पहले रानीबाग के जंगल में आग लगी तो इसे बुझाने के बजाए जिम्मेदार मेरा क्षेत्र......तुम्हारा क्षेत्र.....में उलझ गए। इसके बाद अधिकारियों को हस्तक्षेप करना पड़ा था। उप वन संरक्षक नैनीताल वन प्रभाग चंद्रशेखर जोशी ने बताया कि नैनीताल वन प्रभाग, रामनगर, हल्द्वानी वन प्रभाग और हल्द्वानी की सीमाओं पर आग से निपटने की जिम्मेदारी घटनास्थल के निकटतम क्रू स्टेशन के वनकर्मियों के साथ ही अन्य क्रू स्टेशन की भी होगी। वह मिलकर आग से निपटने की कार्रवाई करेंगे। आग पर काबू पाने में सभी कर्मी सहयोग करेंगे।
तीन सालों में जल गए पांच हजार हेक्टेयर से ज्यादा जंगल
कुमाऊं क्षेत्र में वर्ष 2022 में 3300, अगले वर्ष 800 हेक्टेयर और पिछले साल 1600 हेक्टेअर से ज्यादा जंगल जले। हर साल वनाग्नि विकराल रूप ले रही है जिसमें वनकर्मियों को भी अपनी जान गंवानी पड़ी थी।
तराई पूर्वी के सभी क्रू स्टेशन अलर्ट मोड पर
तराई पूर्वी वन विभाग के सभी क्रू स्टेशन अलर्ट मोड पर हैं। डीएफओ हिमांशु बागरी ने बताया कि वन प्रभाग में सभी 53 क्रू स्टेशन पर नजर है। इन पर कुल 318 वनकर्मियों की तैनाती है। पांच क्रू स्टेशन को फायर प्रूफ जैकेट उपलब्ध करा दी हैं। फायर सीजन से पहले ही काफी संसाधन जुटा लिए हैं।