तराई पश्चिम वन प्रभाग के बैल पड़ाव रेंज (शिवनाथपुर) में कब्जेदारों ने धीरे-धीरे करीब आठ सौ बीघा जंगल पर कब्जा कर लिया। सोमवार को डीएफओ के नेतृत्व में पहुंची टीम कब्जा हटाने पहुंची, लेकिन कब्जेदारों से हुई नोकझोंक के कारण टीम बमुश्किल आठ ही झोपड़ियां हटाकर लौट आई।
तराई पश्चिम वन प्रभाग अवैध कब्जों और अवैध खनन को लेकर बदनाम रहा है। इसमें शिवनाथपुर क्षेत्र लंबे समय से संवेदनशील बना हुआ है। वन विभाग की नाक के नीचे कब्जेदारों ने करीब आठ सौ बीघा जंगल पर कब्जा कर लिया है। एक अनुमान के मुताबिक अतिक्रमणकारियों ने जंगल से छोटे-बड़े करीब सात हजार पेड़ काट डाले। यह खुलासा तब हुआ जब सोमवार को डीएफओ राहुल के नेतृत्व में टीम कब्जा हटाने पहुंची।
टीम वहां यह देखकर दंग रह गई कि बैलपड़ाव रेंज के कंपार्टमेंट 11, 12 और 13 में जंगल का नामोनिशान ही खत्म हो गया है। कब्जेदारों ने पूरे इलाके में करीब 60 से 70 झोपड़ियां बना दी हैं। टीम ने जैसे ही कब्जा हटाने की कार्रवाई की तो कब्जेदार उनसे भिड़ गए। नोकझोंक के बीच केवल आठ झोपड़ियों को ही टीम ध्वस्त कर लौट आई। टीम में एसडीओ जेपी सिंह आदि शामिल थे।
वन कर्मियों की भूमिका संदिग्ध
रामनगर। इतने बड़े एरिया में कब्जा हो गया, लेकिन वन कर्मियों को खबर तक नहीं हो सकी? ऐसे में वन कर्मियों की भूमिका भी संदिग्ध बनी हुई है। वनाधिकारी भी मान रहे हैं कि बहुत मुश्किल है कि इतना बड़े क्षेत्र में कब्जा हो जाए और वन कर्मियों के फील्ड स्टाफ को पता नहीं चले। डीएफओ राहुल के अनुसार मामले की जांच कराई जाएगी, दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।