कांग्रेस संगठन का एंटी करप्शन विभाग खुद कांग्रेस सरकार के लिये भी गले की हड्डी बन सकता सकता है। कांग्रेस संगठन अब भ्रष्टाचार को लेकर जीरो टोलरेंस की बात कर रहा है। अब तक सामने उभर कर आई कांग्रेस संगठन की कार्ययोजना में महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि यह विभाग भ्रष्टाचार का सिर्फ मामला ही नहीं उठाएगा, बल्कि इस मामले को लेकर लोगों के बीच भी जाएगा। जाहिर है कि भ्रष्टाचार की सुई अगर सरकार की अपनी ओर घूमी तो विभाग के कदम सरकार के लिए भी परेशानी का सबब बनेंगे।
सूत्रों के मुताबिक फिलहाल कांग्रेस संगठन एंटी करप्शन विभाग को धार देने में जुटा हुआ है। पूर्व सांसद महेंद्र पाल को विभाग की कमान सौंपे जाने के पीछे भी कारण यही बताया जा रहा है। कांग्रेस संगठन नेताओं के मुताबिक महेंद्र पाल कानून के अच्छे जानकार हैं। संगठन यह नहीं चाहता कि विभाग का कोई भी कदम नक्कार खाने में तूती की आवाज बन कर रह जाए। दूसरी ओर, महेंद्र पाल सिंह पुराने कांग्रेसी भी हैं और दो बार सांसद भी रह चुके हैं।
उनकी कही हुई बात को आसानी से नजरअंदाज करना संभव नहीं होगा। कांग्रेस में वैसे तो राज्य अनुशासन समिति भी है, लेकिन इस समिति की हालत से खुद कांग्रेसी संतुष्ट नहीं हैं। पूर्व में बागियों के खिलाफ कार्यवाही को तत्कालीन अध्यक्ष यशपाल आर्य के कहने पर वापस करने पर भी समिति को मन मसोस कर रह जाना पड़ा था। 2012 के चुनाव के बाद उठे मामलों का भी यही हाल रहा। अब कोशिश यह कि यह एंटी करप्शन विभाग सरकार और संगठन पर अंकुश रखने का काम करे।
खु़द महेंद्र पाल के रुख से साफ है कि विभाग को कांग्रेस एक ऐसे हथियार के रूप में विकसित कर रही है जो वक्त आने पर असरदार साबित हो। महेंद्र पाल के मुताबिक राजनीतिक दलों के सामने विश्वास का संकट है। ऐसे में राजनीतिक दलों को यह विश्वास दिलाना होगा कि किसी दोषी के बचने की गुंजाइश नहीं है। विभाग का गठन इसलिए किया गया है कि दलों के सामने लोकलाज का सवाल भी रहे। विभाग कांग्रेस संगठन का है और अध्यक्ष का जो आदेश होगा, वह माना जाएगा।