ग्राम किशनपुर छोई में जंगली जानवरों का डर किसानों के दिल में ऐसा बैठ गया कि वह अब औने पौने दामों में जमीन बेचने को मजबूर हो गए हैं। दिन रात मेहनत कर फसल को उगाने, बचाने से लेकर घर का हर सदस्य बारी बारी से जुटा रहता है।
इसके बावजूद जंगली जानवर फसल को चौपट करते जा रहे हैं। ग्रामीणों को लंबे समय तक नुकसान का मुआवजा भी नहीं मिलने से अब वह खेती किसानी छोड़ने का मन बनाने लगे हैं। जंगल और कोसी नदी के अगल बगल होने के चलते किशनपुर छोई में जंगली जानवरों की आवाजाही के चलते रोकथाम के लिये कोई भी प्रभावशाली कदम नहीं उठाए गए हैं।
जिससे हिरन, हाथी, सुअर ग्रामीणों की फसलों को चौपट कर रहे हैं। पांच हजार से अधिक जनसंख्या वाले इस क्षेत्र में लगभग चार हजार लोग कृषि कार्य कर अपना गुजर बसर कर रहे हैं। ग्रामीण कहते हैं कि दो वर्षों से जंगली जानवर ज्यादा ही नुकसान कर रहे हैं।
जिस कारण कई लोगों ने फसल लगाने के स्थान पर मवेशियों के लिए चारा बोना शुरू कर दिया है जबकि कई लोग गांव से जमीन बेचकर शहरों की ओर पलायन कर रहे हैं। लेकिन उनका दुख दर्द सुनने वाले न तो कोई नेता, मंत्री हैं और ना ही प्रशासनिक अधिकारी।