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बेला ने उठाया बाछम को बढ़ाने का बीड़ा

Mon, 01 Feb 2016 12:45 AM IST
हिमांशु जोशी/अमर उजाला ब्यूरो, हल्द्वानी।
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आखिर गांवों से पलायन क्यों हो रहा है, क्यों लोग गांव छोड़कर दिल्ली और अन्य मेट्रो सिटी में अपना आशियाना बना रहे हैं, यही चिंता मन में आती थी। कारण ढूंढने की कोशिश की तो पता चला कि यहां रोजगार के कोई साधन नहीं हैं। लोगों को अपने आसपास होने वाली वनस्पतियों, पक्षियों के बारे में जानकारी नहीं है।
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 उनके पास रोजगार के पर्याप्त विकल्प तो हैं, लेकिन सोच नहीं है। कैसे अपने संसाधनों को मार्केट तक पहुंचाया जाए। उनकी इसी समस्या को दूर करने के उद्देश्य से कुछ साथियों को अपने साथ जोड़ा। शुरुआत फेसबुक से की। रिस्पांस मिलने लगा और कारवां बढ़ता चला गया।

मूलरूप से नैनीताल जिले की निवासी और फिल्म डायरेक्टर बेला नेगी बॉलीवुड का जाना पहचाना नाम है। बेला बताती हैं कि उत्तराखंड की रहने वाली हूं, इसलिए मैने यहीं काम करने का निर्णय लिया। हमने बागेश्वर जिले के पिंडारी ग्लेशियर के पास बाछम और खाती गांव चुने।
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यहां मुंबई के ही रहने वाले तीन-चार लोगों के साथ मिलकर बाछम और खाती के स्कूलों में एजुकेशन प्रोग्राम की शुरुआत की। हमने देखा कि वहां के बच्चे अपने आसपास की वनस्पतियों के बारे में नहीं जानते हैं, उन्हें आसपास के पक्षियों तक की जानकारी नहीं थी।

 एजुकेशन प्रोग्राम के तहत हमने बच्चों को उस क्षेत्र का भौगोलिक इतिहास, स्थानीय पक्षी, पौधे और वनस्पति की जानकारी दी। किसी भी प्रोग्राम को चलाने के लिए फंड होना भी जरूरी है। यह एक बड़ी समस्या थी, इसके लिए हमने न तो किसी एनजीओ की मदद ली और न ही सरकार के आगे हाथ फैलाया।

आपस में ही पैसे इकट्ठा करने के साथ ही फेसबुक में ‘रिबिल्ड उत्तराखंड’ नाम से पेज बनाकर अपील डाल दी। जो भी लोग उत्तराखंड के लिए कुछ करना चाहते थे, उन्होंने न केवल पैसे, बल्कि राशन, टेंट आदि की मदद कर प्रोग्राम चलाने में मदद की।

 इसके अलावा वहां के लोगों का कहना था कि हम हमारे पास नेचुरल रिसोर्सज तो हैं, लेकिन उन्हें खरीदेगा कौन। अब हमारा अगला प्रयास यही है कि उन्हें किसी माध्यम से सीधे बाजार से कनेक्ट किया जाए। बेला बताती हैं कि इस संबंध में मेरी मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री से बात हुई हैं, उन्होंने मदद का आश्वासन दिया है।  
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