पिथौरागढ़
- वर्ष 2001 में पिथौरागढ़ में कृषि भूमि का क्षेत्रफल 81165 हेक्टेयर था जो वर्तमान में घटकर 65531 हेक्टेयर ही रह गया है।
- कृषि विभाग के अनुसार सीमांत जिले में 73744 किसान 42000 हेक्टेयर भूमि में खेती करते हैं। इसमें से महज 3200 भूमि हेक्टेयर ही सिंचित है।
बागेश्वर
- कभी धान के कटोरे के रूप में जाने जाने वाले जिला मुख्यालय के मंडलसेरा, बिलौनासेरा आज कंकरीट के जंगल में तब्दील हो रहे हैं।
- जिले में 15-20 साल पहले तीस हजार हेक्टेयर से अधिक भूभाग पर खेती होती थी, आज खेती का रकबा घटकर 2424 हेक्टेयर रह गया है।
- रामगंगा के कटाव से पिथौरागढ़ जिले की सीमा से सटे नामतीचेटाबगड़ क्षेत्र, सरयू के कटाव से कपकोट के ऐठाण आदि क्षेत्रों में कृषि योग्य भूमि नदी की भेंट चढ़ रही है।
चकबंदी पहाड़ के लिए होगी फायदेमंद
खेती को बढ़ावा देने के लिए बरसात के पानी का संरक्षण करने को टैंक बनाए जाने चाहिए। उद्यान और सब्जी उत्पादन से गांवों के युवाओं को रोजगार से जोड़ा जा सकता है। सीमांत जिले में अखरोट, बादाम, सेब, कीवी, नाशपाती के साथ टमाटर, आलू, अदरक आदि का अच्छा उत्पादन हो सकता है। सरकार भी बागवानी, औद्यानिकी को बढ़ावा देने के लिए पॉलीहाउस, बूंद-बूंद सिंचाई, तारबाड़ के साथ ही कई योजनाएं चला रही है। चकबंदी पहाड़ के लिए बेहद फायदेमंद होगी। -डॉ. जितेंद्र क्वात्रा, पंतनगर कृषि प्राध्यापक पंत विवि
चंपावत
- चंपावत जिले में 41 प्रतिशत कम हो गई खेती।
- शुरुआती दौर में 28992 हेक्टेयर क्षेत्र में खेती होती थी, जो अब 16975 हेक्टेयर में सिमट गई है, उत्पादन में 19 फीसदी गिरावट आई है।
- पहाड़ की 70 प्रतिशत से अधिक खेती बारिश पर निर्भर। 16975 हेक्टेयर के सापेक्ष 4511 हेक्टेयर क्षेत्र में ही सिंचाई की सुविधा।
उठाए जा रहे हैं ये कदम
- चंपावत जिले में सामूहिक खेती के जरिये पहल की जा रही है। सहकारिता विभाग की ओर से 14 समितियां अदरक की सामूहिक खेती कर रही हैं।
- परंपरागत कृषि विकास योजना के जरिये जैविक खेती के लिए 1012 हेक्टेयर क्षेत्र में 50 क्लस्टर बनाए गए हैं।
- उद्यान पौधशालाओं को बेहतर कर आलू, कीवी, सेब, सिटरस फल के बीज और पौधों को तैयार कर रहा है।
- चंपावत के मुड़ियानी की पौधशाला को उद्यान के साथ हार्टी टूरिज्म के रूप में भी विकसित करने की पहल।
चंपावत जिले में खेती के रकबा को बढ़ाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। परंपरागत फसल के अलावा मोटे अनाज की खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। खेती को मुनाफे से जोड़ने के लिए खरीद केंद्र बनाने के साथ ही सहकारिता विभाग के जरिये किसानों की फसल को क्रय किया जा रहा है। -गोपाल सिंह भंडारी, मुख्य कृषि अधिकारी, चंपावत।
जिले में किसानों की आय बढ़ाने के लिए सरकार योजनाओं का संचालन कर रही है। किसानों को मोटे अनाज के उत्पादन और परंपरागत खेती के लिए प्रेरित किया जा रहा है। -गीतांजलि बंगारी, प्रभारी मुख्य कृषि अधिकारी
जिले में कीवी का बेहतर उत्पादन हो रहा है। विभाग सेब उत्पादन पर भी ध्यान दे रहा है। फल पट्टियां विकसित की जा रही हैं। युवाओं को रोजगार देने की दिशा में काम किया जा रहा है। - आरके सिंह, जिला उद्यानअधिकारी