जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने महिला की हत्या के मामले में सुनवाई करते हुए आरोपी पति को आजीवन कारावास और 25 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माना अदा न करने पर आरोपी को दो साल का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
मामले के मुताबिक धारी तहसील के ग्राम पनियाली निवासी नंद किशोर पुत्र बरमराम ने अपनी बेटी हेमा की शादी वर्ष 2011 में धारी तहसील के सलियाकोट गांव निवासी हरीश चंद्र पुत्र रमेश चंद्र के साथ की थी। आरोप है कि शादी के कुछ समय बाद ही हरीश दहेज की मांग को लेकर हेमा को प्रताड़ित करने लगा। परेशान होकर कई बार हेमा मायके आकर रहने लगी। हेमा ने मायके वालों के समक्ष खुद की हत्या तक की आशंका जताई थी, लेकिन मायके वाले उसे समझाकर हर बार ससुराल भेज देते थे।
22 अगस्त 2013 को हेमा की उसके ससुराल में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। हेमा के पति ने ग्रामीणों और हेमा के मायके पक्ष के लोगों को बताया कि हेमा की मौत मिर्गी के दौरे के चलते हुई है। 23 अगस्त को हेमा के पिता नंद किशोर ने सुंदरखाल स्थित पटवारी चौकी में तहरीर देकर अंदेशा जताया कि हरीश चंद्र ने ही हेमा की हत्या की है। राजस्व पुलिस ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृतका के गले में नाखूनों के निशान मिलने से दहेज उत्पीड़न के मामले को हत्या की धाराओं में तब्दील कर दिया गया।
मामले की विवेचना के बाद आरोपी पति के खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया गया। सोमवार को जिला एवं सत्र न्यायाधीश कुमकुम रानी की अदालत में हुई सुनवाई के दौरान जिला शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) ने आरोपी के खिलाफ आठ गवाह पेश किए। मामले को सुनने के बाद न्यायाधीश कुमकुम रानी ने मृतका के आरोपी पति हरीश चंद्र को आजीवन कारावास के साथ साथ 25 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माना अदा न करने पर आरोपी को दो साल का अतिरिक्त कारावास की सजा सुनाई गई।