निर्वाण अस्पताल सवालों के घेरे में है। इतना बड़ा बवाल होने और एक मरीज की जान जाने के बाद भी अस्पताल प्रशासन ने पुलिस को खबर नहीं की। उसके दो कर्मचारी भी घायल हो गए। इसके बाद भी मामले को दबाने की कोशिश की गई। मरीजों के परिवार वालों का यही आरोप है कि पूरे बवाल को गंभीरता से नहीं लिया गया।
पुलिस भी इसे बड़ी लापरवाही मान रही है। हालांकि अस्पताल की निदेशक का कहना है कि घटना के बाद वह अपसेट हो गईं थी। इसी कारण सूचना नहीं दे सकी।
कोतवाल नरेश चौहान का कहना है कि रात में उन्हें किसी ने सूचना नहीं दी थी। इसी कारण मरीज को बचाने के लिए पुलिस कोई भूमिका नहीं निभा सकी। समय रहते सूचना नहीं देने के मामले में भी अस्पताल के कर्मचारियों और प्रबंधन का बयान लिया जाएगा।
पुलिस निष्पक्ष ढंग से जांच करेगी। पोस्टमार्टम के दौरान रिपोर्ट की आए तथ्यों से पता चला कि अधिक देर तक खून गिरने से ही तारीक की मौत हुई है, यानी वह घायल होने के बाद देर तक झाड़ियों में पड़ा रहा। तारीक के घर वालों का कहना है कि यदि समय से अस्पताल पहुंचाया जाता तो उसकी जान बचाई जा सकती थी।
पुलिस का कहना है कि घटना की जानकारी मिलने पर सीओ दिनेश ढौंढियाल भी मोर्चरी गए थे। कांग्रेस के नेता और दर्जा प्राप्त मंत्री रहे मतीन अहमद सिद्दीकी, जावेद सहित काफी लोग मोर्चरी पर परिजनों की मदद के लिए पहुंचे।
तारीक के जीजा और निदेशक के बयान में विरोधाभास
निर्वाण संस्था की संचालिका और प्रसिद्ध मनोवैज्ञानिक युवराज पंत की पत्नी रश्मि पंत का कहना है कि उन्होंने घटना के बाद गौजाजाली में रहने वाले तारीक के जीजा मोहसिन रजा को तत्काल फोन कर दिया था। जब तारीक बेहोश मिला तो उसकी सांसें चल रही थीं।
उसी समय उसे मोहसिन के सुपुर्द किया गया था। जबकि मोहसिन का कहना है कि जब फोन आया वह काठगोदाम में थे। जब लगन गार्डन के पास पहुंचे तो चार लोगों ने तारीक का शव उनके हवाले किया।
पुलिस को नहीं मिली सीसीटीवी फुटेज
घटना के दूसरे दिन पुलिस की टीम विशेषज्ञों को लेकर निर्वाण संस्था पहुंची लेकिन सीसीटीवी का डीवीआर खुल नहीं सका। पुलिस को भरोसा था कि सीसीटीवी का फुटेज मिलने से सारे तथ्य सामने आ जाएंगे। यदि फुटेज नहीं मिला तो पुलिस को गवाहों के सहारे विवेचना करनी होगी।
नौ दिन पहले तारीक खुद हुआ था भर्ती
घर वालों का कहना है कि तारीक की अभी शादी नहीं हुई थी। वह मकान के किराए से अपना खर्च चलाता था। नशे की लत को छुड़ाने के लिए वह नौ दिन पहले भर्ती होने के लिए खुद निर्वाण आया था। उसके जीजा मोहसिन रजा गौजाजाली में रहते हैं।
इकलौते बेटे की मौत से मां की हालत खराब
निर्वाण में भर्ती इकलौते बेटे के मौत की सूचना मिलने के बाद मां और बहन की हालत खराब हो गई है। बरेली में लाल मस्जिद मलुकपुर निवासी तारिक इब्राहिम के निर्वाण में भर्ती होने के बाद उसकी मां परवीन गौलाजाली निवासी अपने दामाद मोहसिन रजा के घर रह रही है। इकलौते बेटे के मौत की जानकारी मिलने पर मां की हालत खराब हो गई।
चार मरीज घर पहुंच गए
निर्वाण संस्था की संचालिका रश्मि पंत ने बताया कि अस्पताल से फरार चार मरीज अपने घर लौट आए हैं। उनके परिजनों ने इसकी सूचना दी है। उनका कहना था कि विक्रम, अनिल, विकास, मयंक जोशी के घर वालों ने संस्था से संपर्क किया है। एक अन्य मरीज के घर लौटने की सूचना है। मरीजों के घर वाले उन्हें फिर से भर्ती कराना चाहते हैं।
दोपहर से ही भागने की थी योजना
एसपी सिटी अमित श्रीवास्तव ने शनिवार शाम घटनास्थल का जायजा लिया। पूछताछ से पता चला कि निर्वाण में भर्ती मरीजों ने अस्पताल से भागने के लिए दोपहर में ही योजना बना ली थी। एसपी सिटी ने निर्वाण के छह कर्मचारियों से पूछताछ की।
इसके बाद सीओ दिनेश ढौढियाल और कोतवाल नरेश चौहान के साथ करीब 600 मीटर दूर लगन गार्डन के पास पहुंचे। जांच के दौरान पुलिस को खाली प्लाट में खून से निशान मिले। पुलिस को आशंका है कि तारीक इसी स्थान पर गिरा था।