मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) ने आम सत्यापन प्रक्रिया को कई परिवारों के लिए भावनात्मक यात्रा बना दिया है। फॉर्म भरते समय लोग अपने भूले-बिसरे नाना-नानी के नाम तलाश रहे हैं और पुरानी पेटियों से दशकों पुराने प्रमाणपत्र निकाल रहे हैं।
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) ने सत्यापन की सामान्य प्रक्रिया को कई परिवारों के लिए यादों की यात्रा में बदल दिया है। प्रपत्रों में दर्ज होने वाले नामों की पड़ताल के बीच कहीं भूले हुए नाना-नानी के नाम तलाशे जा रहे हैं तो कहीं वर्षों से बंद संदूकों में रखे पुराने प्रमाणपत्र फिर बाहर आ रहे हैं। दस्तावेज की जांच के साथ लोग अपनी पारिवारिक जड़ों, पुराने रिश्तों और बीते दौर की यादों से भी दोबारा जुड़ रहे हैं।
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एसआईआर नोटिस मिलने के बाद कई मतदाता अपने परिवार की पुरानी जानकारियां जुटा रहे हैं। मंगलवार को हिम्मतपुर मल्ला ऊंचापुल स्थित आंगनबाड़ी केंद्र में ऐसा ही एक मामला सामने आया। एक व्यक्ति अपने परिवार के पांच सदस्यों के प्रपत्रों का सत्यापन कराने पहुंचा था। माता के प्रपत्र में उनके पिता यानि व्यक्ति के नाना का नाम दर्ज किया जाना था। अधिकारी ने जब नाना का नाम पूछा तो वह सोच में पड़ गए। उन्होंने ननिहाल पोन कर परिजनों से जानकारी ली, जिसके बाद नाना का नाम मिल सका और प्रपत्र पूरा हुआ।
यह एक सामान्य प्रक्रिया है। लोग इसे सकारात्मक रूप से देखें और जरूरी दस्तावेज जमा कर मतदाता सूची में हुई विसंगति को दूर करा लें। - एपी बाजपेयी, सिटी मजिस्ट्रेट हल्द्वानी
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केस-1
अल्मोड़ा से हल्द्वानी आकर बसे एक परिवार के छह सदस्यों में से तीन लोगों का सत्यापन आसानी से हो गया लेकिन तीन सदस्यों के प्रपत्रों के लिए अतिरिक्त दस्तावेज मांगे गए। इसके बाद परिवार के एक सदस्य ने वर्षों पुराना स्थायी निवास प्रमाणपत्र प्रस्तुत किया जिसके आधार पर सत्यापन की प्रक्रिया पूरी हो सकी।
केस-2
हिम्मतपुर मल्ला ऊंचापुल आंगनबाड़ी 2 केंद्र में एक बुजुर्ग महिला अपने परिवार के सदस्यों का सत्यापन कराने पहुंची थीं। सत्यापन के दौरान उनके पति के दस्तावेज में हाईस्कूल का प्रमाणपत्र लगाने की आवश्यकता सामने आई। पुराने प्रमाणपत्र को खोजने के लिए उन्होंने अधिकारियों से दो दिन का समय मांगा।