ज्योलीकोट (नैनीताल)। शुरुआत से राष्ट्रीय राजमार्ग के अधिकारियों की लापरवाही का दंश झेल रहा वीरभट्टी पुल का एक हिस्सा बृहस्पतिवार को धंस गया। यह हादसा मरम्मत के दौरान गार्डर बदलने की प्रक्रिया के दौरान हुआ। इससे पुल एक ओर झुक गया है। इससे जल्द यातायात सुचारु होने की उम्मीद लगाए बैठे आसपास के गांवों के लोगों को बड़ा झटका लगा है। लोगों का आरोप है कि विभाग की घोर लापरवाही से ब्रिटिशकालीन पुल का अस्तित्व खत्म हो गया है।
बीते 25 सितंबर को गैस सिलेंडरों से लदे ट्रक में आग लगने के बाद विस्फोटों से ज्योलीकोट-कर्णप्रयाग हाइवे पर ज्योलीकोट के पास स्थित वीरभट्टी पुल क्षतिग्रस्त हो गया था। इतनी बड़ी दुर्घटना के बावजूद प्रशासन और राष्ट्रीय राजमार्ग के अधिकारी लापरवाही बरत रहे थे। अधिकारियों ने इस पुल पर वाहनों के आवागमन पर पाबंदी लगाकर इतिश्री कर ली थी। लापरवाही का आलम ये था कि हादसे के बाद जलते हुए सिलेंडरों को वहीं पर पड़ा छोड़ दिया गया।
अमर उजाला में खबर प्रकाशित करने के दो दिन के बाद वहां से सिलेंडर हटाए गए। जनता की परेशानियों को दरकिनार करते हुए रुड़की के इंजीनियर के इंतजार में अधिकारी 11 दिन तक अपने दफ्तर में आराम फरमाते रहे। इंजीनियर के निरीक्षण के बाद भी एनएच के अधिकारी रिपोर्ट आने का हवाला देकर हाथ पर हाथ धरे बैठे रहे। लोगों के बढ़ते दबाव के बाद अपनी कुर्सी से हिले अधिकारियों ने करीब हफ्ते भर पहले मरम्मत का काम शुरू किया। लेकिन, पुल की मरम्मत का कार्य वेल्डिंग में लगे कारीगरों के भरोसे छोड़ दिया गया। इस दौरान विभाग का कोई तकनीकी विशेषज्ञ या कर्मचारी मौजूद नहीं रहा।
बृहस्पतिवार दोपहर साढ़े बारह बजे जब मजदूर पुल के काटे गये हिस्से को क्रेन की मदद से हटाने का प्रयास कर रहे थे तभी अचानक पुल का एक हिस्सा भार सहन नहीं कर पाया और पुल का यह छोर नीचे नाले की ओर लटक गया। पुल का एक हिस्सा धंसने के बाद राष्ट्रीय राजमार्ग के अधिकारियों में हड़कंप मच गया। आनन-फानन में एनएच के मुख्य अभियंता एजाज अहमद, एसई सीएम पांडे और ईई महेंद्र कुमार मौके पर पहुंचे। दूसरी ओर पुल धंसने की सूचना मिलते ही मौके पर आसपास के दर्जनों लोग भी जा पहुंचे। स्थानीय लोग इस हादसे के लिए एनएच के अधिकारियों और जिला प्रशासन को कोसते रहे।
अब नया पुल बनेगा
ज्योलीकोट (नैनीताल)। क्षतिग्रस्त वीरभट्टी पुल के धंसने के बाद अब नया पुल बनाने की तैयारी की जा रही है। एनएच के मुख्य अभियंता एजाज अहमद ने कहा कि 25 सितंबर को गैस सिलेंडरों के विस्फोट से पुल के लोहे के ढांचे को जबरदस्त नुकसान हुआ था और इसकी आधार संरचना में लगे गार्डर अपनी मजबूती खो चुके थे। इस कारण मरम्मत के दौरान कमजोर पुल भार सहन नहीं कर पाया। उन्होंने कहा कि 101 वर्ष पुराने पुल की आयु समाप्त हो चुकी थी। विभाग नए पुल के लिए पहले ही आगणन बनाकर शासन को भेज चुका है। विकल्पों पर विचार किया जा रहा है। फिलहाल स्थानीय लोगों की आवाजाही लिए पैदल मार्ग बनाया जाएगा।
ग्रामीणों ने एनएच के अफसरों को सुनाई खरीखोटी
ज्योलीकोट (नैनीताल)। वीरभट्टी पुल पर वाहनों की आवाजाही की उम्मीदों पर बृहस्पतिवार को पानी फिरने से एक माह से परेशान ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने एनएच के अधिकारियों को जमकर खरीखोटी सुनाई।
आरटीआई कार्यकर्ता ट्रावा मैसी, जिला पंचायत सदस्य डॉ. हरीश बिष्ट, नैनीताल पालिका के सभासद डीएन भट्ट, बेलुवाखान के ग्राम प्रधान हिमांशु पांडे, पूर्व प्रधान तारा सिंह, इंदर नेगी, सुरेंद्र कोटलिया, रमेश भट्ट, बीडीसी सदस्य प्रदीप कुमार, महेश जोशी, मनोज कांडपाल, जितेन्द्र पाठक आदि ने एनएच के अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए। लोगों का कहना था कि विभागीय अधिकारियों ने लापरवाही की हदों को पार कर अच्छे मजबूत पुल को खत्म कर दिया।
एक भी प्रशासनिक अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा
ज्योलीकोट (नैनीताल)। वीरभट्टी स्थित पुल का एक हिस्सा धंसने की सूचना मिलने के बाद भी जिला प्रशासन का कोई अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि राष्ट्रीय राजमार्ग पर पुल की मरम्मत को लेकर जिला प्रशासन कितना संजीदा था। प्रशासनिक अधिकारियों के मौके पर न पहुंचने को लेकर स्थानीय लोगों में भारी गुस्सा था।
17 नवंबर से भीमताल, भवाली के सैकड़ों लोग बेमियादी धरने पर बैठेंगे
भीमताल (नैनीताल)। भीमताल की ब्लाक प्रमुख गीता बिष्ट और जिला पंचायत सदस्य डा. हरीश सिंह बिष्ट ने बृहस्पतिवार को वीरभट्टी स्थित ब्रिटिशकालीन पुल के धंसने के लिए जिला प्रशासन और राष्ट्रीय राजमार्ग के अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने कहा कि यदि एनएच के अधिकारियों ने 16 नवंबर तक ज्योलीकोट-भवाली रोड पर वाहनों की आवाजाही शुरू नहीं कराई तो 17 नवंबर को भीमताल ब्लाक व नगर के अलावा भवाली के सैकड़ों लोग डीएम दफ्तर में बेमियादी अनशन पर बैठ जाएंगे।
ब्लाक प्रमुख गीता बिष्ट और जिला पंचायत सदस्य डा. हरीश सिंह बिष्ट का कहना है कि जिला प्रशासन और राष्ट्रीय राजमार्ग के अधिकारी पुल में हुए गैस सिलेंडर हादसे के बावजूद इस रोड पर वाहनों की आवाजाही को लेकर कतई गंभीर नहीं थे। उन्होंने कहा कि यदि अधिकारी गंभीर होते तो क्षतिग्रस्त पुल को ठीक होने में न तो एक माह से अधिक का समय लगता और न ही मरम्मत के दौरान पुल धंसता। डा. बिष्ट का कहना है कि ज्योलीकोट-भवाली रोड पर यातायात बंद होने से भीमताल और भवाली की जनता बुरी तरह से त्रस्त है।