नैनीताल। जंगलों में वन्यजीवों के हमलों के बाद ज्योली व आसपास के क्षेत्र में दहशत का माहौल है। ज्योली क्षेत्र में हेमा पांडे और सूर्यागांव में हंसी देवी व भड्यूनी में कमल को बाघ के निवाला बनाए जाने की घटनाओं के बाद लोग जंगल जाने से डर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक पकड़े गए बाघ और बाघिन के आदमखोर होने की पुष्टि नहीं हो जाती तब तक क्षेत्र में लगाए गए पिंजरे और निगरानी व्यवस्था जारी रखी जाए।
क्षेत्र में घटनाओं के बाद वन विभाग ने संयुक्त अभियान चलाकर एक बाघ और एक बाघिन को ट्रेंकुलाइज कर पकड़ लिया था लेकिन अब तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि महिलाओं व युवक पर हमला करने वाले वही वन्यजीव थे या नहीं। इसको लेकर ग्रामीणों में भय बना हुआ है।
लोगों का कहना है कि जंगल से घास, लकड़ी और पशुओं के चारे के लिए जाने वाली महिलाओं और ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए। मामले में ब्लॉक प्रमुख डॉ. हरीश बिष्ट ने कहा कि क्षेत्र के लोगों में अब भी भय है। वन विभाग ने कह दिया कि जंगल न जाएं लेकिन ग्रामीण बिना जंगल जाए अपना जीवन यापन नहीं कर सकते। उन्होंने कहा कि जब तक बाघों के आदमखोर होने की पुष्टि नहीं हो जाती तब तक क्षेत्र में लोगों के बीच भय बना रहेगा।
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सतर्कता बरतने की अपील
मामले में डीएफओ आकाश गंगवार ने बताया कि प्रथम दृष्ट्या पकड़े गए बाघ और बाघिन ही महिलाओं की मौत के लिए जिम्मेदार प्रतीत हो रहे हैं लेकिन इसकी अंतिम पुष्टि डीएनए रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगी। उन्होंने कहा कि तब तक वन विभाग की ओर से क्षेत्र में लगातार गश्त की जा रही है। साथ ही कैमरा ट्रैप और पिंजरे भी लगाए गए हैं ताकि किसी भी गतिविधि पर नजर रखी जा सके। वन विभाग ने ग्रामीणों से अकेले जंगल न जाने और सतर्कता बरतने की अपील की है।