शनिवार को स्वस्ति वाचन और शगुन आंखर के साथ उत्तरायणी मेले (घुघुतिया त्यार) का विधिवत शुभारंभ पर्वतीय सांस्कृतिक उत्थान मंच हीरानगर में हो गया। स्वस्ति वाचन और शगुन आंखर के बीच मुख्य अतिथि आपदा प्रबंधन अध्यक्ष प्रयाग भट्ट ने मां सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप जलाकर मेले का शुभारंभ किया।
इस मौके पर मुख्य अतिथि भट्ट ने कहा कि ‘यो हमौर त्यारै न्हाती बल्कि यो हमैरि संस्कृति, हमैरि पछ्यांण और हमैरि थाती की याद दिलूंण हीं वाल त्यार छू। नानतिनो मेरी आपूं लोगनहिं विनती छू कि कभै ले आपूंणि थाती के झन भुलिया।’
उन्होंने कहा कि उत्तरायणी मेले को आज इस भव्य स्वरूप को दिलाने का श्रेय पर्वतीय सांस्कृतिक उत्थान मंच के संस्थापक अध्यक्ष बलवंत सिंह चुफाल को जाता है। एक समय ऐसा था जब पर्वतीय समाज के लोग डरे और सहमे रहते थे। तब इनमें जान फूंकने का काम बलवंत चुफाल ने किया।
उन्होंने अपनी बोली, भाषा, संस्कृति को पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उत्तरायणी मेला पहाड़ी उत्पादों को बाजार दिलाने में भी सफल रहा है। जो पर्वतीय कृषि और पहाड़ी महिलाओं की आर्थिकी से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा है।
इससे पूर्व मंच के संस्थापक अध्यक्ष बलवंत सिंह चुफाल, अध्यक्ष डा. चंद्रशेखर तिवारी, महासचिव गोपाल सिंह बिष्ट, मेला संयोजक पूरन चंद्र भंडारी, सांस्कृतिक कार्यक्रम के संयोजक प्रह्लाद मेहरा, रैली संयोजक त्रिलोक बनौली, उपाध्यक्ष हेम चंद्र भट्ट ने परंपरागत रीति रिवाज से मुख्य अतिथि का स्वागत किया।