रामनगर क्षेत्र की दुष्कर्म पीड़िता किशोरी भले ही जिंदगी की जंग हार गई मगर दोषी को उसकी मौत के तीन साल बाद सजा मिली है। विशेष न्यायाधीश पॉक्सो नंदन सिंह ने उसे 20 साल के कारावास और 20 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। कोर्ट ने किशोरी की मेडिकल जांच रिपोर्ट, फॉरेंसिक साइंस लैब रिपोर्ट और पीड़िता के बयान दर्ज करने वाली तत्कालीन मजिस्ट्रेट के बयानों के आधार पर सजा सुनाई।
एडीजीसी नवीन चंद्र जोशी ने बताया कि 11 नवंबर 2020 को रामनगर क्षेत्र की 15 वर्षीय किशोरी रात करीब 11 बजे घर से लापता हो गई थी। 12 नवंबर 2020 की सुबह वह पड़ोस में रहने वाले समुदाय विशेष के युवक के साथ क्षेत्र के ही एक स्कूल के पास मिली। पिता की तहरीर पर पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर युवक को हिरासत में ले लिया था। किशोरी के बयान हुए तो पता चला कि युवक उसे शादी करने की बात कहकर रात में अपने घर ले गया और जबरन शारीरिक संबंध बनाए। पुलिस ने छह जनवरी 2021 को कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की। 21 अक्तूबर 2021 को कोर्ट ने मामले की सुनवाई शुरू की। इसी बीच दिल में दर्द उठने की वजह से किशोरी की मौत हो गई।
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जांच, बयान और गवाह बने न्याय का आधार
घटना के अगले दिन मौके पर मिले किशोरी और आरोपी के कपड़ों को फॉरेंसिक जांच के लिए देहरादून लैब भेजा गया था। जांच रिपोर्ट में दुष्कर्म की पुष्टि हुई। किशोरी की मेडिकल जांच में भी दुष्कर्म की पुष्टि हुई थी। किशोरी की मौत के चलते उसके बयान कोर्ट में नहीं हो पाए। एडीजीसी ने बताया कि कोर्ट में नौ गवाह पेश किए गए। इनमें पीड़िता के पिता, घटना के बाद किशोरी के बयान दर्ज करने वाली मजिस्ट्रेट, फॉरेंसिक साइंस लैब एक्सपर्ट और मामले की जांच अधिकारी शामिल रहे।