नैनीताल हाईकोर्ट ने ज्योलीकोट और उसके आसपास के गांवों-गांजा, वीरभट्टी, छीणा, बेलुवाखान तथा सरियाताल में दूषित पेयजल के कारण फैली जल जनित बीमारियों का बेहद गंभीर संज्ञान लिया है। पिछले तीन महीनों से क्षेत्र में डायरिया और पीलिया जैसी बीमारियां फैलने, दो लोगों की मौत होने तथा बड़ी संख्या में ग्रामीणों के बीमार होने व अस्पताल में भर्ती होने के मामले को लेकर बेलुवाखान निवासी अधिवक्ता रवि बिष्ट ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी।
याचिकाकर्ता ने इसका उल्लेख करते हुए विभागीय अधिकारियों की निष्क्रियता का मुद्दा उठाया तथा प्रभावितों के निःशुल्क इलाज व स्वच्छ पेयजल आपूर्ति की मांग की गई।न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी एवं न्यायमूर्ति सिद्धार्थ साह की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले की अलार्मिंग स्थिति को देखते हुए हाईकोर्ट ने नैनीताल के जिलाधिकारी, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, उत्तराखंड जल संस्थान के महाप्रबन्धक और उत्तराखंड पेयजल निगम के मुख्य अभियंता को 8 सितंबर को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में तलब किया है।
अदालत ने इन अधिकारियों को जल जनित बीमारियों के प्रकोप से निपटने. स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने तथा इस समस्या के स्थाई समाधान के लिए पूरी कार्ययोजना और ब्यौरे के साथ उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए उत्तराखंड जल संस्थान के अधिशासी अभियंता को आदेश दिया है कि वे प्रभावित गांवों के निवासियों को तत्काल प्रभाव से स्वच्छ और संदूषण-मुक्त पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित करें। हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि दूषित जल आपूर्ति और स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही के कारण लोगों के जीवन पर संकट बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, जिसके चलते प्रशासनिक व विभागीय आला अधिकारियों की जवाब देही तय की जा रही है।