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उत्तराखंड: शिक्षकों के दुर्गम-सुगम स्थानांतरण मामले में हाईकोर्ट सख्त, शिक्षा निदेशक से मांगा जवाब

Wed, 16 Sep 2026 11:07 PM IST
Heera अमर उजाला नेटवर्क, नैनीताल

सार

नैनीताल हाईकोर्ट ने राज्य में शिक्षकों के दुर्गम और सुगम क्षेत्रों में स्थानांतरण को लेकर माध्यमिक शिक्षा निदेशक से जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं और मामले की अगली सुनवाई 26 अक्टूबर को तय की है। 
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उत्तराखंड हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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नैनीताल हाईकोर्ट ने राज्य में शिक्षकों के दुर्गम और सुगम में स्थानांतरण को लेकर माध्यमिक शिक्षा निदेशक से जवाब दाखिल करेन के निर्देश देते हुए मामले की अगली सुनवाई के लिए 26 अक्टूबर की तिथि नियत की है। कोर्ट ने यह भी बताने को कहा हैं कि इस समस्या का समाधान किस तरह किया जाएगा और अब तक इसके लिए क्या कदम उठाए गए हैं।मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता एवं न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार जीवन सिंह ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी।

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अदालत के समक्ष राज्य सरकार की ओर से स्थानांतरित शिक्षकों से संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत किए गए जिसके जवाब में कहा गया कि लेक्चरर के 189 शिक्षक दुर्गम से सुगम तथा 04 शिक्षक सुगम से दुर्गम क्षेत्रों में भेजे गए। इसी तरह कुमाऊं मंडल में एलटी के 133 शिक्षक दुर्गम से सुगम और केवल 3 शिक्षक सुगम से दुर्गम क्षेत्रों में स्थानांतरित हुए। प्राथमिक शिक्षा संवर्ग में 171 शिक्षक दुर्गम से सुगम क्षेत्रों में तथा सुगम से दुर्गम क्षेत्रों में 52 शिक्षकों का तबादला हुआ। सुनवाई के दौरान यह सुझाव दिया गया कि इन दोनों के बीच अंतर को अतिथि शिक्षकों की मदद से दूर किया जा सकता है।

कोर्ट ने कहा कि राज्य की ओर से यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि इस दिशा में अब तक क्या कदम उठाए गए हैं और दुर्गम क्षेत्रों से बड़ी संख्या में शिक्षकों के सुगम क्षेत्रों में तबादले के बाद वहां शिक्षण व्यवस्था और शिक्षा के स्तर को किस प्रकार बनाए रखा जाएगा। अदालत ने माध्यमिक शिक्षा निदेशक को शपथपत्र दाखिल कर पूरे मामले पर स्थिति स्पष्ट करने को कहा है। कोर्ट ने सरकार को कार्मिक एवं सतर्कता विभाग द्वारा शिक्षा मंत्री की अध्यक्षता वाली समिति की रिपोर्ट के आधार पर लिए गए निर्णय को भी एक सप्ताह के भीतर रिकॉर्ड पर रखने की अनुमति दी गई है।

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