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Uttarakhand News: छह माह में नियमितीकरण संबंधी नियम बनाए सरकार : हाईकोर्ट

Fri, 05 Sep 2025 12:07 PM IST
हीरा मेहरा अमर उजाला नेटवर्क, नैनीताल

सार

प्रदेश में कॉन्ट्रैक्ट व आउटसोर्स कर्मियों के नियमितीकरण पर जल्द ही स्थिति स्पष्ट होने वाली है। इस संबंध में उच्च न्यायालय ने एक ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए राज्य सरकार को आदेश दिए हैं।
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उत्तराखंड हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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प्रदेश में कॉन्ट्रैक्ट व आउटसोर्स कर्मियों के नियमितीकरण पर जल्द ही स्थिति स्पष्ट होने वाली है। इस संबंध में उच्च न्यायालय ने एक ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए राज्य सरकार को आदेश दिए हैं कि छह माह के भीतर नियमितीकरण संबंधी नियम बनाए जाएं साथ ही, सरकार को निर्देश दिया है कि हाल ही में जारी विज्ञापन के तहत याचिकाकर्ता और एक अन्य समान स्थिति वाले कार्मिक के पद खाली रखे जाएं। सरकार ने कोर्ट को बताया कि सात सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति गठित की गई है जो कॉन्ट्रैक्ट व आउटसोर्स कर्मियों के नियमितीकरण पर विचार करेगी।

मुख्य न्यायाधीश जी नरेन्दर और न्यायमूर्ति आलोक मेहरा की खंडपीठ ने नर्सिंग कॉलेज में 15 वर्षों से कॉन्ट्रैक्ट पर सेवा दे रहे असिस्टेंट प्रोफेसर (पूर्व में लेक्चरर) के मामले में सुनवाई करते हुए सरकार को यह निर्देश दिए। कोर्ट ने असिस्टेंट प्रोफेसर को भी बड़ी राहत देते हुए कहा कि तब तक याचिकाकर्ता की सेवा यथावत जारी रहेगी।

मामले के अनुसार देहरादून स्थित स्टेट नर्सिंग कॉलेज में याचिकाकर्ता मयंक कुमार जामिनी को वर्ष 2010 में लेक्चरर पद पर चयन के बाद कॉन्ट्रैक्ट आधार पर नियुक्त किया गया था। इसके बाद से वह लगातार 15 वर्षों से सेवा दे रहे हैं। इस बीच पद का नाम बदलकर असिस्टेंट प्रोफेसर कर दिया गया। याचिकाकर्ता का कहना था कि उनकी सेवा बिना रुकावट के लगातार बढ़ाई जाती रही, लेकिन अब सरकार ने 14 जुलाई 2025 को असिस्टेंट प्रोफेसर के 16 पदों का विज्ञापन जारी कर दिया, जिसमें वह पद भी शामिल था जिस पर वह कार्यरत हैं। उन्होंने कहा कि वह योग्यता और अनुभव की सभी शर्तें पूरी करते हैं और इतने वर्षों से कार्यरत हैं, फिर भी न तो उन्हें नियमित किया गया और न ही समान कार्य के लिए समान वेतन दिया गया। साथ ही, विज्ञापन में न तो आयु सीमा में छूट दी गई और न ही अनुभव का कोई वेटेज। उन्होंने इसे मनमाना और अवैध बताया। राज्य सरकार ने कहा कि विज्ञापन नियमों के अनुरूप जारी किया गया है। हालांकि यह भी स्वीकार किया कि मुख्यमंत्री की घोषणा और कैबिनेट निर्णय के बाद सात सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति गठित की गई है, जो कॉन्ट्रैक्ट व आउटसोर्स कर्मचारियों के नियमितीकरण पर विचार करेगी।

हाईकोर्ट ने ये दिए निर्णय

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अपने निर्णय में में कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता 15 वर्षों से निरंतर सेवा दे रहे हैं और सरकार स्वयं नियम बनाने की प्रक्रिया में है। ऐसे में, फिलहाल उनके पद को विज्ञापन से अलग रखा जाए। अदालत ने स्पष्ट किया कि छह माह में नियम बनाए जाएं और उसके बाद याचिकाकर्ता के नियमितीकरण पर निर्णय लिया जाए। तब तक वह अपने पद पर कार्यरत रहेंगे और पूर्ववत वेतन पाते रहेंगे।

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