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किसान सुखवंत सिंह आत्महत्या मामला: हाईकोर्ट ने पूर्व थाना प्रभारी कुंदन सिंह के खिलाफ एफआईआर-चार्जशीट की रद्द

Mon, 31 Aug 2026 12:25 PM IST
Heera अमर उजाला नेटवर्क, नैनीताल

सार

उत्तराखंड हाईकोर्ट की न्यायमूर्ति आलोक महरा की एकलपीठ ने किसान सुखवंत सिंह की आत्महत्या के मामले में आईटीआई थाने के पूर्व प्रभारी कुंदन सिंह को बड़ी राहत देते हुए उनके विरुद्ध दर्ज एफआईआर और चार्जशीट को निरस्त कर दिया।
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उत्तराखंड हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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उत्तराखंड हाईकोर्ट ने किसान सुखवंत सिंह के बहुचर्चित आत्महत्या प्रकरण में एक याचिका पर सुनवाई के बाद आईटीआई थाने के तत्कालीन प्रभारी कुंदन सिंह को बड़ी राहत देते हुए उसके खिलाफ दर्ज एफआईआर व दाखिल चार्जशीट को निरस्त कर दिया है। न्यायमूर्ति आलोक महरा की एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार मामला थाना आईटीआई, ऊधमसिंह नगर में दर्ज एफआईआर में कुंदन सिंह पर आत्महत्या सहित कई आरोप लगाए गए थे। आरोप था कि उन्होंने मृतक के साथ दुर्व्यवहार किया और उससे 5 लाख रुपये लिए थे। मृतक ने बाद में आत्महत्या कर ली थी।

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हाईकोर्ट ने कहा कि आत्महत्या के लिए उकसाने का अपराध बनाने के लिए केवल उत्पीड़न या आरोप पर्याप्त नहीं है। आरोपी की ओर से आत्महत्या के लिए प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से उकसाने, प्रेरित करने वाला सकारात्मक कृत्य, स्पष्ट मानसिक मंशा और आत्महत्या के समय के निकट ऐसा कृत्य होना आवश्यक है। कोर्ट ने पाया कि उपलब्ध सामग्री में कुंदन सिंह की ओर से आत्महत्या के लिए उकसाने या आपराधिक धमकी देने की ऐसी मंशा का प्रमाण नहीं था। इसलिए कोर्ट ने याचिका मंजूर करते हुए एफआईआर और चार अप्रैल 2026 को दाखिल की गई चार्जशीट को याचिकाकर्ता के संबंध में रद्द कर दिया है। इसमें लिप्त अन्य आरोपियों को मुकदमे का सामना करना पड़ेगा।

बता दें कि जनवरी की रात काशीपुर के ग्राम पैगा निवासी सुखवंत ने काठगोदाम के एक होटल में खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली थी। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। मृतक के परिजनों का आरोप था कि प्रॉपर्टी डील में चार करोड़ रुपये से अधिक लेने के बाद डीलरों ने न तो रजिस्ट्री कराई और न रुपये लौटाए। शिकायत करने पर आईटीआई थाने के तत्कालीन एसओ ने दुर्व्यवहार किया और बाद में रुपये दिलाने के नाम पर पांच लाख रुपये ले लिए। इस मामले में दर्ज प्राथमिकी में पुलिस ने पांच अप्रैल को तत्कालीन थाना प्रभारी कुंदन सिंह रौतेला सहित 12 के खिलाफ धारा 108, 351(2) व 352 के तहत चार्जशीट लगाई थी। याचिका पर सुनवाई कर हाईकोर्ट ने कहा कि जांच में एसओ के खिलाफ धारा 108 बीएनएस के आरोपों की पुष्टि नहीं हो पाई है। याचिकाकर्ता ने शिकायत की खुद जांच नहीं कर एसआई जितेंद्र को मार्क की थी। अदालत ने कहा कि लेन-देन के संबंध में भी आरोप पुष्ट नहीं हुए है और ना ही ली गई रकम को केस प्रापर्टी बनाया गया है। याचिकाकर्ता के खिलाफ उकसाने और धमकाने का कोई ठोस सबूत नहीं मिला है। अदालत ने इस आधार पर याचिकाकर्ता के खिलाफ एफआईआर और चार्जशीट को रद्द कर दिया है।

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