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राष्ट्रपति शासन के मामले में मंगलवार को भी जारी रहेगी सुनवाई

Tue, 19 Apr 2016 04:07 AM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, नैनीताल
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हाईकोर्ट भवन नैनीताल - फोटो : अमर उजाला
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हाईकोर्ट में राष्ट्रपति शासन और बजट अध्यादेश के खिलाफ दायर याचिकाओं पर भारत के अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने दिन भर बहस की। उन्होंने कोर्ट में केंद्र सरकार का पक्ष रखते हुए वित्त विधेयक, स्टिंग ऑपरेशन, वित्त विधेयक पर वोटिंग न होने तथा सरकार के अल्पमत में आ जाने संबंधी विषयों पर अपनी बहस केंद्रित की। हाईकोर्ट ने इस प्रकरण पर मंगलवार को भी बहस जारी रखने के निर्देश दिए हैं।
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मुख्य न्यायाधीश केएम जोसेफ एवं न्यायमूर्ति वीके बिष्ट की संयुक्त खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत और अन्य ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लगाने और बजट अध्यादेश के खिलाफ याचिका दायर की थी।

याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया था कि राष्ट्रपति ने 31 मार्च को अध्यादेश जारी किया था जिसके तहत उत्तराखंड के वित्त विधेयक को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पारित कर दिया। याचिका में कहा गया था कि वित्त विधेयक जो उत्तराखंड विधानसभा में पहले ही पारित कर चुका था उसे केंद्र सरकार पुन: पारित नहीं कर सकती। साथ ही कहा गया कि वित्त विधेयक विधानसभा में पारित हुआ या नहीं हुआ इसका निर्णय केवल विधानसभा अध्यक्ष ही कर सकता है। याचिकाकर्ता की ओर सेे 31 मार्च को जारी अध्यादेश को निरस्त करने की मांग की गई थी।
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'उत्तराखंड में था वित्तीय संकट, इसलिए लगाना पड़ा राष्ट्रपति शासन'

अटॉर्नी जनरल - फोटो : gettty
मुकुल रोहतगी की ओर से कहा गया कि स्पीकर सदन के दौरान 35 विधायकों की मतविभाजन की मांग को नजरअंदाज नहीं कर सकते थे लेकिन ऐसा हुआ। उन्होंने कहा कि 18 मार्च को कोई वोटिंग नहीं हुई। जब वोटिंग ही नहीं हुई तो बिल कैसे पास हो सकता है क्योंकि सरकार बहुमत खो चुकी थी।

राष्ट्रपति शासन के खिलाफ दायर याचिका में मुकुल रोहतगी की ओर से कहा गया कि पूर्व मुख्यमंत्री द्वारा विधायकों की खरीद फरोख्त की जा रही थी जिसका स्टिंग भी टीवी चैनलों के माध्यम से  दिखाया गया था। इसके बाद राष्ट्रपति शासन लगाना आवश्यक हो गया था।

मुकुल रोहतगी की ओर से कहा गया कि राज्य की संवैधानिक विफलता के कारण 18 मार्च को सरकार गिर गई थी और विनियोग विधेयक पास नहीं हो सका था। इस कारण राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाना एकमात्र विकल्प था। एक अप्रैल से नया वित्तीय वर्ष शुरू होने से राज्य का बजट पास नहीं हुआ था अत: केंद्र सरकार को उत्तराखंड को वित्तीय संकट से बचाने के लिए बजट अध्यादेश लाना पड़ा। मुकुल रोहतगी की ओर से सतपाल डंग, गुवाहाटी और मद्रास केस के कई निर्णयों का हवाला दिया गया। इस प्रकरण पर मंगलवार को भी सुनवाई जारी रहेगी।
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