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उत्तर प्रदेश के पानी पर तैर रहा बांध का मुद्दा

Wed, 30 Nov 2016 01:29 AM IST
कैलाश पाठक
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DAM - फोटो : FILE
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जमरानी बांध की स्वीकृति में एक बार फिर अड़ंगा लग गया है। अब उत्तर प्रदेश सरकार जमरानी बांध के प्रस्ताव पर एमओयू करने से मुकर रही है। उत्तर प्रदेश सरकार को आशंका है कि अगर जमरानी बांध बन गया तो उत्तराखंड पूरा पानी रोक लेगा और उत्तर प्रदेश की सिंचाई व्यवस्था प्रभावित होगी।
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लांकि उत्तराखंड के अधिकारी उन्हें पर्याप्त पानी देने का आश्वासन दे रहे हैं, जबकि यूपी के अफसर सहमति पत्र पर हस्ताक्षर से पहले पूरी तरह आश्वस्त होना चाहते हैं।

सिंचाई विभाग के मुख्य अभियंता (उत्तर) डीसी सिंह खेतवाल ने बताया बांध निर्माण की अधिकांश आपत्तियों का निस्तारण करा लिया गया है। सिंचाई मंत्री इस मामले को स्वयं देख रहे हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश ने बांध बनने पर कम पानी मिलने की आशंका जताई है।
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हालांकि जमरानी बांध बनने की दशा में उत्तर प्रदेश को सिंचाई के लिए 57 फीसदी पानी देने का प्रस्ताव है, जबकि 43 फीसदी पानी तराई की पेयजल व्यवस्था के लिए निर्धारित किया गया है। जमरानी बांध मुद्दे पर एनओसी को लेकर दोनों प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों, सिंचाई मंत्रियों और आला अफसरों की बैठक हो चुकी है।

यूपी अब 83.42 फीसदी पानी देने पर ही एमओयू करने की बात कह रहा है। उत्तराखंड के लिए वह मात्र 16.58 फीसदी पानी ही छोड़ना चाहता है। यूपी का तर्क है कि उत्तराखंड की अपेक्षा उनके पास सिंचाई का अधिक रकबा है। श्री सिंह का कहना है कि यूपी में मात्र 0.5 मीटर गहराई में सिंचाई हो जाती है और जबकि उत्तराखंड में 3 मीटर गहराई में सिंचाई होती है।

यूपी से बात चल रही है कि वह उत्तराखंड को उसकी जरूरत के हिसाब के कम से कम 38.6 प्रतिशत पानी उत्तराखंड के लिए छोड़ने को राजी हो जाए और वह 61.6 प्रतिशत पानी यूपी के लिए लें, ताकि दोनों ही प्रदेशों की सिंचाई ठीक से हो सके।

अब यूपी की ओर से नया अड़ंगा लगाए जाने से बांध निर्माण की स्वीकृति जल्द मिलने की संभावना कम नजर आ रही है। हालांकि सिंचाई अधिकारियों के मुताबिक जल्द ही दोनों राज्यों के अधिकारियों की बैठक होनी है। उम्मीद है अब यूपी मान जाएगा।

41 साल से लटकी है परियोजना

1975 में स्वीकृत 61.25 करोड़ रुपए लागत की जमरानी बांध परियोजना को 41 साल से केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की आपत्तियों की वजह से मंजूरी नहीं मिल पाई है। इस बहुउद्देश्यीय परियोजना में 26.54 करोड़ रुपए खर्च हो चुके हैं।

61.25 करोड़ से 2356 करोड़ पहुंची लागत
जमरानी बांध की लागत 1975 में जहां 61.25 करोड़ रुपए थी। उसकी लागत आज 41 साल बाद बढ़कर 2356 करोड़ रुपए पहुंच गई है।
यूपी में सिंचित क्षेत्रफल : 47607 हेक्टेयर
उत्तराखंड में सिंचित क्षेत्रफल : 9458 हेक्टेयर

पुनर्वास पर बन गई सहमति
सिंचाई विभाग के मुख्य अभियंता डीसी सिंह खेतवाल के मुताबिक जमरानी बांध की स्वीकृति में आड़े आ रहा सबसे बड़ा पेंच डूब क्षेत्र के लोगों के पुनर्वास के मामले में काफी हद तक सफलता मिल गई है। ऊधमसिंह नगर के जिलाधिकारी ने काशीपुर में भूमि उपलब्ध कराने पर सहमति जताई है। हैड़ाखान ट्रस्ट के अधिकारियों से भी वार्ता हुई है।
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जमरानी बांध परियोजना पर एक नजर

1975 में केंद्रीय भू जल आयोग ने दी मंजूरी
1979 में 61.25 करोड़ रुपये मंजूर

1981 में गौला बैराज और 40 किमी नहरों का निर्माण
1984 में पर्यावरणीय मंजूरी के लिए भेजा गया प्रस्ताव

2009 में शासन ने टोकन मनी के रूप में दी एक करोड़ की धनराशि
2010 में मंत्रालय ने दी पर्यावरण की सैद्धांतिक मंजूरी

क्या थी पर्यावरण मंत्रालय की आपत्तियां
डूब क्षेत्र में आ रहे 129 परिवारों का पुनर्वास
बांध क्षेत्र की भूगर्भीय स्थिति का सर्वेक्षण

वन्य जीवों और वनस्पतियों का अध्ययन
डूब क्षेत्र में आ रहे पेड़ों की एवज में क्षतिपूरक  वनीकरण

भूमि हस्तांतरण प्रस्ताव तैयार करना
हाइड्रोलॉजी रिपोर्ट केंद्र को भेजना

अभी इन आपत्तियों का होना है निस्तारण
डूब क्षेत्र में आ रहे 129 परिवारों का पुनर्वास
यूपी से जल बंटवारे पर सहमति एमओयू कराना

केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की स्वीकृति
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