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उर्स में बही अकीदत की बयार

Thu, 25 May 2017 01:54 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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उर्स में बही अकीदत की बयार - फोटो : amar ujala
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वारसी कालोनी स्थित हजरत सय्यद माशूक अली शाह की दरगाह पर तीन दिन तक सूफियाना महफिलें सजीं। कव्वाल पाटियों ने बुजुर्गों की शान में कलाम पेश किए तो उलेमा ने बुजुर्गों की सीरत पर रोशनी डालते हुए उनके नक्शे-कदम पर चलने की अपील की। बुधवार की रात कुल शरीफ की रस्म के साथ उर्स का समापन हो गया। इस दौरान अमन और तरक्की की दुआएं मांगी गईं।
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बाबा के 24वें सालाना उर्स का आगाज सोमवार को किया गया था। दरगाह पर तीन दिन तक कुरआन ख्वानी, दुआएं, तकरीर, महफिले समां और चादरपोशी का सिलसिला चलता रहा। सुबह से देर रात तक सूफियाना कलाम की बयार रही।

बुधवार सुबह आयोजित आम लंगर में बड़ी तादाद में अकीदतमंदों ने शिरकत की। रात में आयोजित महफिले समां में रामपुर के कव्वाल मोहम्मद अहमद, जावेद और देवा शरीफ से आए गुलाम वारिस की पार्टियों ने एक से बढ़कर एक कलाम पेश कर महफिल को उरूज पर पहुंचा दिया।
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रात 2:35 बजे कुल शरीफ हुआ। उसके बाद चार बजे हजरत वारिस पाक रहमतुल्लाह अलैहि के उर्स का कुल हुआ। इस दौरान बाबा रफीक शाह, पंडित हरिशंकर, बाबा जमाल शाह, इनायत वारसी बतौर मेहमान-ए-खुसूसी मौजूद रहे।

दरगाह कमेटी के सचिव हसीन खां वारसी ने बताया कि बृहस्पतिवार की सुबह फज्र की नमाज के बाद महफिले इमामेन होगी, जिसमें करबला के वाकियात पर चर्चा होगी। उर्स के आयोजन में नसीर अहमद वारसी, सगीर अहमद वारसी, सलीम अहमद शाह, हशमत वारसी आदि ने सहयोग दिया। 
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