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दवा की दुकान खाली कराने को लेकर हंगामा

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सुशीला तिवारी अस्पताल।
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हल्द्वानी। सुशीला तिवारी अस्पताल में चल रही दवा की दुकान राजकीय मेडिकल कॉलेज प्रबंधन की तमाम कोशि के बाद भी खाली नहीं हो सकी। दुकान खाली कराने को लेकर शनिवार को हंगामा हुआ। दुकान से जुड़े एक व्यक्ति ने अपने को दुकान के अंदर बंद कर लिया और हृदय रोग का मरीज होने का हवाला देते हुए कहा कि अगर उसे कुछ हुआ तो राजकीय मेडिकल कॉलेज प्रबंधन जिम्मेदार होगा।
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एसटीएच में दवा की दुकान का नया टेंडर 26 अगस्त को होना है मगर पूर्व से संचालित दुकान अभी खाली नहीं हुई है। राजकीय मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अरुण जोशी ने बताया कि दुकान खाली करने को लेकर नोटिस दिए गए थे। 20 अगस्त तक चेतावनी दी गई थी कि दुकान खाली न करने पर शनिवार को कब्जा ले लिया जाएगा। जब टीम के साथ दुकान खाली कराने पहुंचे तो दुकान स्वामी कुछ समय मांगता रहा। दोपहर दो बजे दुकान स्वामी ने कहा कि चार बजे तक का समय दीजिए। चार बजे शाम को जब ताला डालने पहुंचे दुकान से जुड़ा एक व्यक्ति कुछ महिलाएं समेत दुकान के अंदर ही बैठ गया। डॉ. जोशी ने बताया कि मामले की जानकारी डीएम, सिटी मजिस्ट्रेट और पुलिस को दी गई है।
उधर, वैंटेज बायोटेक प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर अमित कांत वॉस और एमडी विकास कृष्णा का कहना है कि दुकान चलाने का तीन वर्ष का करार मेडिकल कॉलेज से हुआ था। करार के तहत किराया जमा किया जा रहा है। 17 मार्च 2020 को कोविड 19 के चलते एसटीएच को केवल कोरोना मरीजों के लिए आरक्षित कर दिया गया। निरंतर घाटे में चलने के बाद भी दवा की दुकान का संचालन किया गया। आयुष्मान योजना के तहत 57.6 प्रतिशत की छूट दवाइयों और 63.9 प्रतिशत की छूट सर्जिकल सामग्री पर निरंतर दी गई। अस्पताल प्रबंधन ने आयुष्मान संबंधी भुगतान अब तक नहीं किया है। कृष्णा ने आरोप लगाया कि नए प्राचार्य अपने किसी विशेष व्यक्ति को यह दुकान आवंटित करना चाहते हैं इसलिए सुप्रीम कोर्ट के निर्णय की भी अवहेलना कर रहे हैं। बिना किसी न्यायालय के आदेश के प्रशासन और पुलिस के साथ दुकान खाली करने का दबाव बना रहे हैं। सिविल केस लंबित होने के बाद भी जबरदस्ती की जा रही है और मानसिक एवं शारीरिक उत्पीड़न किया जा रहा है। इस बारे में प्राचार्य डॉ. अरुण जोशी का कहना है कि अपने किसी व्यक्ति को दुकान दिए जाने के आरोप निराधार हैं।
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