भाजपा और कांग्रेस सरकारों ने अब तक राज्य की स्थायी राजधानी गैरसैंण घोषित करने को लेकर कोई अंतिम फैसला नहीं लिया, जो गंभीर है। दोनों सरकारों ने अपराधियों, खनन व भू माफियाओं को ही संरक्षण दिया। उक्रांद के पूर्व केंद्रीय अध्यक्ष और पूर्व विधायक डा. नारायण सिंह जंतवाल ने सोमवार को मल्लीताल में पार्टी की ओर से आयोजित उत्तराखंड की स्थायी राजधानी गैरसैंण घोषित करने को लेकर धरना प्रदर्शन किया।
जंतवाल ने राज्य स्थापना दिवस के मौके पर होने वाले सभी कार्यक्रमों का राजकीयकरण किए जाने पर भी रोष जताया। वरिष्ठ नेता प्रकाश पांडे ने कहा कि राज्य बनने के बाद प्रदेश ने क्या खोया और क्या पाया यह एक विचारणीय प्रश्न है। डा. सुरेश डालाकोटी ने कहा कि उक्रांद के दबाव की वजह से देहरादून स्थायी राजधानी घोषित नहीं हो सकी।
धरना स्थल में दिनभर ...गैरसैंण अब दूर नहीं, और कोई मंजूर नहीं जैसे कई नारे लगा रहे थे। संचालन लक्ष्मी नारायण लोहनी ने किया। इस मौके पर भवान सिंह,खीमराज सिंह बिष्ट, नवीन चंद्र साह, केसी उपाध्याय, मनोज साह, हरीश बिष्ट, असीम बख्श, सुरेंद्र सिंह नेगी, धीरू बिष्ट आदि मौजूद थे।