उच्चशिक्षा निदेशालय का नवनिर्मित भवन हैंडओवर होने से पहले ही खंडहर होने लगा है। निदेशालय भवन में पार्टीशन करने के लिए लगाए गए लाइटवेट फ्रेम स्ट्रक्चर के टुकड़े जगह - जगह से टूट कर गिर रहे हैं। साल भर के अंदर निदेशालय भवन खस्ताहाल होने पर निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं।
गौलापार स्थित उच्चशिक्षा निदेशालय का कार्यालय भवन का निर्माण अवस्थापना विकास निगम द्वारा गया है। इसके निर्माण पर करीब पांच करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। लेकिन उच्चशिक्षा निदेशालय कार्यालय नवनिर्मित भवन में शिफ्ट हुए अभी एक वर्ष भी नहीं हुआ है कि भवन की हालत बदहाल सी होने लगी है। हाल यह है निदेशालय भवन में कार्यालय चेंबर आदि के लिए पार्टीशन करने को निर्माण एजेंसी अवस्थापना विकास निगम द्वारा लाइटवेट फ्रेम स्ट्रक्चर का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया गया था जो कि अब जगह जगह से टूट कर गिरना शुरू हो गया है।
लाइटवेट स्ट्रक्चर खड़ा करने के लिए फ्रेम में भरा गया पाउडर जैसा मसाला निकल कर बाहर आ रहा है तथा कई चेंबरों में तो दीवार का फ्रेम ही उखड़ गया है। इसी तरह कार्यालय के प्रथम तल पर निदेशालय कार्यालय में एक नहीं कई स्थानों पर लाइटवेट फ्रेम की ऊपरी परतें उखड़ गई हैं। कार्यालय की इस स्थिति को देख निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं। इसके अलावा अग्निशमन के लिए लगाए गए उपकरण भी अधूरे लगे हैं। इनमें पानी सप्लाई के लिए पाइप ही नहीं है। पार्किंग स्टैंड पर टीनशेड ही नहीं डाला गया। इसी तरह अन्य कार्य भी अधूरे छोड़ दिए गए हैं। कर्मचारियों का कहना है कि कार्यालय पिछले साल 22 जुलाई 2015 को नये भवन में शिफ्ट हुआ था तथा एक साल में इसका यह हाल हो गया तो पांच - दस साल होने पर क्या हाल होगा। निर्माण कार्य की जांच होनी चाहिए।
---------
डीपीसी न होने से 33 कालेजों में नहीं हैं प्राचार्य
हल्द्वानी। उच्चशिक्षा विभाग के रिक्त पदों के लिए डीपीसी न होने के कारण प्रदेश के 33 राजकीय महाविद्यालयों में प्राचार्य के पद ही रिक्त हैं। इसी तरह निदेशक के पद के लिए भी डीपीसी नहीं हुई है। वरिष्ठता के आधार पर एमबीपीजी कालेज के प्राचार्य डा. बीसी मेलकानी बतौर प्रभारी निदेशक काम देख रहे हैं। इसके अलावा निदेशालय में संयुक्त निदेशक का एक पद, उपनिदेशक के दो पद, सहायक निदेशक का एक पद रिक्त चल रहा है।
जानकारी के मुताबिक प्रदेश में 94 राजकीय डिग्री कालेज हैं जिनमें से केवल 61 कालेजों में प्राचार्य हैं बाकी में सीनियर प्राध्यापक को प्राचार्य का चार्ज दे रखा है। इसी तरह डिग्री कालेजों में स्वीकृत 1861 प्राध्यापकों के पदों के सापेक्ष केवल 702 पदों पर ही नियमित प्राध्यापक हैं। बाकी पदों पर संविदा एवं गेस्ट फैकल्टी से काम चलाया जा रहा है।
नवनिर्मित भवन अभी उच्चशिक्षा निदेशालय के हैंडओवर नहीं हुआ है। दफ्तर में जगह - जगह पार्टीशन के लिए बनाए गए लाइटवेट फ्रेम की परतें उखड़ कर गिर रही हैं। इस बारे में निर्माण एजेंसी अवस्थापना विकास निगम के प्रोजेक्ट मैनेजर को पत्र लिखा है। निगम ने इसे दुरुस्त कराने का आश्वासन दिया है। अधूरे कार्य पूरे करने को भी निर्माण एजेंसी को कहा गया है।
- डा. बीसी मेलकानी, प्रभारी निदेशक उच्चशिक्षा