पंपापुरी, भरतपुरी, कौशल्यापुरी और टेढ़ा रोड मोहल्लों समेत कई संगठनों के सैकड़ों लोग बाढ़ से सुरक्षा की मांग को लेकर कोसी नदी में ही जल सत्याग्रह आंदोलन के लिए उतर पड़े। सुबह करीब 10:30 बजे से दोपहर एक बजे तक हुए जल सत्याग्रह में बड़ी संख्या में महिलाएं भी शामिल रहीं।
कमर तक पानी में खड़े लोगों ने बरसात में नदी से होने वाले नुकसान के प्रति सरकार और प्रशासनिक अधिकारियों का ध्यान खींचने की कोशिश की। जल सत्याग्रह के दौरान नारेबाजी के बीच आम सभा में लोगों ने कहा कि दो-दो मुख्यमंत्रियों की तटबंध बनाने की घोषणा आज तक पूरी नहीं हो सकी है। उन्होंने सरकार से आपदा का इंतजार करने की बजाय तुरंत बाढ़ सुरक्षा कार्य कराने की मांग की।
पंपापुरी लोक कल्याण समिति के बैनर तले भरतपुरी वाटर टैंक के पास कोसी में चले जल सत्याग्रह में नदी में कमर तक डूबे प्रदर्शनकारी हाथों में तख्तियां लिए हुए थे। इनमें रामनगर को रामबाड़ा बनाने से बचाने की अपील करते हुए सीएम से बाढ़ सुरक्षा योजनाओं के लिए धन आवंटन कराने की मांग का जिक्र था।
इस दौरान चली आम सभा में समिति के अध्यक्ष गणेश रावत ने कहा कि सीएम की घोषणा पूरी कराने के लिए हरसंभव प्रयास और आंदोलन के बाद अब सांकेतिक जल सत्याग्रह किया गया है। यदि मांग जल्दी ही नहीं मानी गई तो अनशन और अनिश्चितकालीन जल सत्याग्रह किया जाएगा। प्रदर्शनकारियों ने मुख्यमंत्री और सिंचाई मंत्री के रामनगर आगमन पर घेराव करने का एलान भी किया।
सभा में ललित मोहन पांडे, नीलम गुप्ता, ललित घुघत्याल, नरेंद्र सिंह रावत, अंजू रावत, विमला आर्य, डा. धनेश्वरी घिल्डियाल, सरिता मेहरा, आलोक गुसाई, राकेश नैनवाल, पूरन पांडे, रामसिंह रावत, शिक्षक नेता नवेंदु मठपाल आदि ने विचार व्यक्त किए। जल सत्याग्रह के दौरान वहां पहुंचे एसडीएम एसएस जंगपांगी को मुख्यमंत्री और सिंचाई मंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन दिया गया। इस दौरान जल पुलिस के जवान भी तैनात रहे।
आंदोलन को शहर के राजनैतिक सामाजिक संगठनों के अलावा व्यापार मंडल ने भी समर्थन दिया। इनमें व्यापार मंडल के संरक्षक मनमोहन अग्रवाल, उपपा के महासचिव प्रभात ध्यानी, ईको सेंसेटिव जोन संघर्ष समिति के ललित उप्रेती, आप नेता गिरीश मठपाल, समाजसेवी हरीश चंद्र सती, नवीन सुनेजा, राहुल रावत, प्रकाश शर्मा, गोविंद शर्मा, गोपाल भंडारी, रतन सिंह भाकुनी, खीम सिंह पंवार, देवकी पंवार, दीपा सती, कमला रावत, शीला भंडारी, विभा श्रीवास्तव, कमला ढौढियाल, आशा बिष्ट, सुमित्रा बिष्ट, बीएस रावत, दिलवर सिंह, नंदन नेगी, गौरव पांडे, केएस अधिकारी, रूप सिंह, केएस नेगी, डीएस नेगी, राजेंद्र रावत समेत बड़ी संख्या में क्षेत्रवासी जल सत्याग्रह में शामिल रहे।
बरसात में डराता है कोसी का पानी
रामनगर। नगर के उत्तरी किनारे पर बसे लोगों को बरसात में कोसी नदी का विकराल रूप डराता है। 1993 और 2010-11 की बाढ़ में यहां काफी नुकसान हुआ था। लोगों के जानमाल की सुरक्षा के लिए नदी पर तटबंध निर्माण जरूरी है। इसके लिए प्रदेश के दो मुख्यमंत्रियों ने कोसी नदी पर तटबंध बनाने की घोषणा की।
वर्ष 2005 में तत्कालीन सीएम एनडी तिवारी की कोसी बैराज से पंपापुरी होकर आमडंडा तक तटबंध-बाईपास बनाने की। घोषणा सरकारी रिकार्ड में सीएम घोषणा संख्या 139 ए 2005 के रूप में दर्ज है। उसके लिए करीब 40 करोड़ रुपए का बजट 10 साल बाद भी मंजूर नहीं हुआ। 10 साल बाद जनता के दबाव में सर्वे का काम शुरू हुआ।
जनांदोलन के बाद 2013 में तत्कालीन मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने कोसी पर बाढ़ सुरक्षा के लिए तटबंध और स्पर बनाने की घोषणा की, जिसका चार करोड़ 12 लाख रुपए का प्रस्ताव सिंचाई विभाग की तकनीकी सलाहकार समिति से पास है, लेकिन सरकार ने पैसा नहीं दिया। इस बीच कुछ छिटपुट कार्य हुए हैं, जिन्हें आंदोलनकारी सरकारी धन की बर्बादी मानते हैं।