उत्तराखंड में अब पर्वतीय क्षेत्रों के लिए उपयोगी कानून ही विधि क्षेत्र में स्थायी रहेंगे, जबकि अनुपयोगी कानून को हटा दिया जाएगा। साथ ही प्रदेश के लिए उपयोगी कानून में जरूरत के अनुसार परिवर्तन भी किया जाएगा।
विधि अध्ययन दल के उपाध्यक्ष रमेश कापड़ी ने एक भेंट में बताया कि बीते दिनों मुख्यमंत्री हरीश रावत की ओर से विधि अध्ययन के लिए वरिष्ठ अधिवक्ताओं का नौ सदस्यीय दल गठित की गई है। यह दल प्रदेश में लागू तमाम कानूनों का अध्ययन करेगा। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड बनने के बाद आज भी ऐसे तमाम कानून हैं जो यूपी से जस के तस यहां लिए गए हैं, जबकि पर्वतीय राज्य होने के कारण कई कानूनों की यहां जरूरत ही नहीं है। ऐसे कानूनों को या तो हटाए जाने या इनमें बदलाव की जरूरत है।
इन कानूनों में अवैध शराब, खनन, भूमि संबंधी आदि कानून शामिल हैं। उन्होंने कहा कि पर्वतीय इलाकों में भूमि संबंधी कानून में बड़े बदलाव की जरूरत भी बताई। श्री कापड़ी ने बताया कि विधि अध्ययन दल अगले तीन महीने तक राज्य में लागू इसी तरह के कानूनों का अध्ययन करेगा। वह कानूनों में बदलाव के लिए कानून के जानकारों और आम जनता की राय लेकर रिपोर्ट तैयार करेगा, जिसे मुख्यमंत्री को सौंपा जाएगा।