जू सभागार में रविवार को नैनीताल वन प्रभाग और भूमि संरक्षण वन प्रभाग के अधिकारियों व कर्मियों की फॉरेस्ट फायर मैनेजमेंट को लेकर कार्यशाला हुई। वन विभाग के उच्चाधिकारियों ने कर्मियों का आह्वान किया कि वनों को आग से बचाने के लिए सदैव तत्पर रहें।
नैनीताल वन प्रभाग के प्रभागीय वनाधिकारी धर्म सिंह मीणा ने बताया कि फायर सीजन को देखते हुए विगत वर्ष की तुलना में 68 के स्थान पर 102 क्रू स्टेशन स्थापित किए गए हैं। 12 रेंज स्तरीय कंट्रोल रूम और एक प्रभाग स्तरीय मास्टर कंट्रोल रूम बनाया गया है। फायर लाइनों की सफाई का कार्य पूरा हो चुका है। सड़क किनारे जो जंगलों में पिरूल गिर रहा है, उसकी नियमित सफाई की जा रही है।
वन अधिकारियों व कर्मियों को आग बुझाने के लिए नए उपकरणों को चलाने के लिए यह प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया है। कार्यशाला में बर्ड वॉचिंग व फोटोग्राफी का प्रशिक्षण वरिष्ठ पक्षी विज्ञानी डॉ. असद रहमानी, केएस सजवाण जबकि डीएफओ कुबेर सिंह बिष्ट तथा एसडीओ दिनकर तिवारी ने वनाग्नि प्रबंधन पर प्रशिक्षण दिया, जबकि वरिष्ठ वन कर्मी हरीश पंत ने 19 अप्रैल को प्रस्तावित मॉक ड्रिल के बारे में बताया। कार्यशाला में अपर मुख्य वन संरक्षक (वन्य जीव) डॉ. धनंजय मोहन, आरओ प्रकाश जोशी, प्रभाग के डीएफओ धर्म सिंह मीणा आदि थे।
अपर प्रमुख वन संरक्षक (वन्य जीव) डॉ. धनंजय मोहन ने कहा कि नैनीताल के किलबरी-पंगोट विनायक ईको टूरिज्म सर्किट को नैना देवी हिमालयन बर्ड कंजरवेशन रिजर्व के रूप मेें विकसित करने के बाद अब उसकी मैनेजमेंट कमेटी का गठन किया जा रहा है। वन विभाग का प्रयास है कि यहां पर लोगों को बर्ड वॉचिंग का प्रशिक्षण दिया जाए, ताकि पर्यटन को बढ़ावा मिले। उन्होंने इस बात पर खुशी जताई कि देश में 1263 पक्षियों की प्रजातियां हैं, जिसमें से अकेले उत्तराखंड में ही 760 पक्षियों की प्रजातियां पाई जाती हैं।
गर्मी के दिनों में वनों में आग लगने की घटनाएं कम से कम हों इसके लिए वन विभाग वाहन गानों का सहारा ले रहा है। जू में चल रही कार्यशाला के मध्य सत्र में वन विभाग के अपर प्रमुख वन संरक्षक (वन्य जीव) डॉ. धनंजय मोहन ने एक ऐेसे ही वाहन को प्रभाग की विभिन्न रेंजों के लिए रवाना किया, जो लोगों को पहाड़ी गानों के माध्यम से वनों को आग से बचाने के लिए प्रेरित करेगा।