आखिरकार अब्दुल मतीन सिद्दीकी को कांग्रेस में जाने से क्या लाभ होगा? यह सवाल राजनीति से जुड़े लोगों से लेकर खासकर मुस्लिम बस्ती में खूब मथा। इस फैसले को लेकर तमाम चर्चा और कयास लगाये गए।
बातचीत में कुछ लोगों का कहना था कि 18 साल के राजनैतिक कैरिअर के दौरान सपा की तरफ से सुरक्षा (सुरक्षा कर्मी भी दिये गये थे), बड़े नेताओं का वरदहस्त मिला। मतीन के पारिवारिक कार्यक्रमों में यूपी के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव तक पहुंचे।
मंचों से जीत के लिये भी कहा गया, लेकिन मतीन से जीत से दूर रही। ऐसे में लगातार हार से थकने और एक एरिया के ठप्पे से बाहर निकलने की कोशिशों की बात भी कही जाती रही। अब इस ‘मौके’ को लेकर भी खूब कयास लग रहे हैं।
इसमें विधानसभा चुनाव करीब आने और मौके को भुनाने की बात कही जा रही है। चर्चाओं और कयासों में जसपुर से विधायक सीट के लिये दावेदारी से लेकर भविष्य में होने वाले हल्द्वानी में मेयर सीट पर बातचीत और आश्वासन मिलने की बात कही जाती रही।
पलायन करते गये नेता
यूपी में मंत्री प्रेम प्रताप सिंह ने सपा से लोकसभा का चुनाव लड़ा और हार मिली। इसके बाद उन्होंने प्रदेश छोड़कर यूपी में भाग्य आजमाने का फैसला किया और जीतने के साथ मंत्री पद तक पहुंच गए। इस तरह पहले रईसुल हसन भी सयुस से जुड़े। फिर उन्होंने बसपा का दामन थाम लिया। अब मतीन कांग्रेस में शामिल हो गए।
40 हजार वोट पर नजर
हल्द्वानी विधानसभा सीट पर बनभुलपुरा, इंद्रानगर, आजाद नगर, नई बस्ती के इलाके वोट काफी अहमियत रखते हैं। एक अनुमान से इन इलाकों में करीब 40 हजार वोटर हैं, जो कौन विधायक होगा, उसके फैसले में अहम भूमिका निभाते हैं। अब बदली परिस्थितियों में प्राथमिक तौर पर कांग्रेस को फायदा होता दिख रहा है।