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18 साल बाद ‘साइकिल’ से उतरे मतीन

Tue, 09 Aug 2016 11:38 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, हल्द्वानी।
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सपा मुख्‍यालय - फोटो : अमर उजाला
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सपा के महासचिव अब्दुल मतीन सिद्दीकी 18 साल बाद साइकिल से उतर से उतर गये हैं। सपा के सबसे बड़े झंडाबरदारों में एक रहे मतीन के कांग्रेस में जाने से सपा को झटका लगा है। मतीन के जरिये सालों से हल्द्वानी और आसपास में ‘साइकिल’ चल रही थी।
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19 मार्च 1998 को सपा नेता और मतीन के छोटे भाई अब्दुल रऊफ की हत्या कर दी गई थी। रऊफ की पहचान जुझारू और जनाधार वाले नेता के तौर पर थी। रऊफ की हत्या के बाद मतीन सिद्दीकी सपा की सक्रिय राजनीति में उतरे। 2000 में नया राज्य बन गया लेकिन मतीन ने रऊफ की विरासत, पार्टी का झंडा नहीं बदला।

2002, 2007  से लेकर 2012 में विधानसभा चुनाव में उतरे। सपा की जीत सुनिश्चित कराने के लिए सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव से लेकर आजम खां तक  के नेताओं ने रैली और जनसभा कर जोर लगाया लेकिन जीत दूर ही रही। मतीन 2013 में मेयर के चुनाव में उतरे।
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इस चुनाव में उन्होंने भाजपा के मेयर डा. जोगेंद्र रौतेला को कड़ी टक्कर दी। कांटे की टक्कर में करीब 1500 वोट से मतीन जीत से दूर रह गये। उस वक्त पुनर्मतदान की बात हुई, लेकिन बाद में मामला टल गया। अब कांग्रेस के जरिये नई पारी और नये निशाने तय करने का कयास लगाये जा रहे हैं। 

पार्टी सम्मेलन जल्द हल्द्वानी में : प्रदेश उपाध्यक्ष

सपा प्रदेश उपाध्यक्ष सुरेश परिहार का कहना है कि मतीन के साथ नैनीताल जिले और प्रदेश स्तर का कोई भी पदाधिकारी कांग्रेस में शामिल नहीं हुआ है। मतीन के जाने से कोई फर्क नहीं पड़ने वाला है। जल्द ही पार्टी हल्द्वानी में कार्यकर्ता सम्मेलन करेेगी। मतीन को पार्टी ने जिला अध्यक्ष से महासचिव तक की जिम्मेदारी दी। मतीन ने कांग्रेस ज्वाइन कर एक तरह अपनी राजनैतिक हत्या कर ली है। प्रदेश सचिव ललित मोहन जोशी का कहना था कि मतीन के जाने से पार्टी और मजबूत होगी।


घर, कार्यालय, मोहल्ले में सपा 

अब्दुल मतीन सिद्दीकी के मोहल्ले से लेकर घर और कार्यालय तक में दोपहर तक सपा का झंडा, बैनर लगा हुआ था। सपा का जो कार्यालय बना हुआ था, उसकी फोटो गैलरी में सपा के संघर्ष, जनसभाओं में नेताओं के साथ फोटो ही प्रदर्शित हो रहे थे। हालांकि कार्यालय में मिठाई वितरण करने के साथ मतीन के बेटे उमेर घर से नेटवर्क संभाल रहे थे।

लगे कांग्रेस के बैनर पहले से सपा में मतीन के जाने का सुराग लगना कहा जाए या फिर आनन-फानन की तैयारी। जैसे ही मतीन के कांग्रेस में शामिल होने की खबर लगी। कांग्रेसी नेता पम्मी सैफी आदि बड़े बैनर चोरगलिया रोड पर लगा दिये। पम्मी सैफी का कहना था मतीन का फैसला सही है। लंबे समय से उनको कांग्रेस में शामिल करने की कोशिश चल रही थी।
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