आतंक का पर्याय बनी आदमखोर बाघिन बुधवार को भी शिकारियों और वन कर्मियों को चकमा दे सुरक्षित बच निकली। हालांकि बाघिन की तस्वीरें कैमरा टैप में कैद हुई हैं।
बाघिन को पिंजरे में फंसाने के लिए बांधे गए कटरे (भैंस का बछड़ा) को भी बाघिन ने घायल कर दिया है। बाघिन के अब तक नहीं पकडे़ जाने से ग्रामीणों में रोष और दहशत बनी हुई है।
बाघिन को मारने के लिए गांव गोरखपुर में कटरे को बांधा गया था और कुछ ही दूरी पर शिकारियों को भी बैठाया गया था। बाघिन तड़के करीब 4:30 बजे कटरे के पास आ आई और उसे घायल भी किया, लेकिन शिकारी एक बार फिर बाघिन को मारने से चूक गए।
इसका पता कैमरा ट्रैप चेक करने पर लगा तो विभाग दंग रह गया। विभाग ने रोज की तरह नई जगह में पिंजरे, मचान और कैमरा ट्रैप लगाए हैं। इसके बावजूद खेतों की जाल से घेराबंदी की गई, लेकिन वह नही मिली।
22 अक्तूबर को कार्बेट बंद का ऐलान
आदमखोर बाघिन के आतंक से निजात दिलाने को लेकर ईको सेंसिटिव जोन विरोधी संघर्ष समिति ने 22 अक्तूबर को कॉर्बेट पार्क बंद का ऐलान किया है। बैठक के प्रचार के लिए इस संबंध में बुधवार को समिति ने ग्राम ढेला में एक बैठक आयोजित की।
वक्ताओं ने कहा कि बाघिन को मारने में अब तक विभाग पूरी तरह असफल साबित हुआ है। चेतावनी दी गई कि 22 अक्तूबर तक यदि बाघिन को नहीं मारा गया तो उस दिन पार्क के सभी गेटों को बंद किया जाएगा। समिति के संयोजक ललित उप्रेती ने बताया कि बृहस्पतिवार को ग्राम मोतीपुर में दोपहर दो बजे से बैठक होगी।
बैठक में कमला देवी, मनोज सत्यवली, पूरन सिंह, त्रिलोक सिंह, गोपाल मेहरा, दिगंबर पपनै, चंद्रशेखर करगैती, मनमोहन बिष्ट, मनमोहन अग्रवाल, पीसी जोशी, डॉ. धनेश्वरी घिल्डियाल आदि थे।