22 दिन से क्षेत्र में सक्रिय बाघ ने सोमवार सुबह फिर एक महिला को जख्मी कर दिया। महिला को तत्काल चिकित्सालय लाया गया। हालत गंभीर होने पर उसे हल्द्वानी रेफर किया गया। गुस्साए ग्रामीणों ने घटना के विरोध में वन विभाग के खिलाफ नारेबाजी करते हुए दो घंटे तक कानियां चौराहे पर जाम लगाया और प्रमुख मुख्य वन संरक्षक डीएस खाती का पुतला फूंका।
घटना की सूचना पर मौके पर पहुंचे एसडीएम परितोष वर्मा को भी महिलाओं ने खरीखोटी सुनाई। ग्रामीणों के हंगामे पर कोतवाल संजय पांडे भी भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन ग्रामीण अपनी मांग पर अड़े रहे। देर रात तक बाघ की घेराबंदी की जा रही थी।
सेमलखलिया निवासी सुमन नेगी अपने ही परिवार की प्रभा, गीता, हेमा, राधा आदि महिलाओं के साथ अपने खेत में मवेशियों के लिये चारा काट रही थी। इसी बीच बाघ ने सुमन पर हमला बोल दिया। बाघ सुमन को खींचकर जंगल की ओर ले जाने लगा।
सुमन के साथ ही साथ गई महिलाओं ने भी शोर मचाना शुरू किया। हल्ला सुन बाघ ने सुमन को जख्मी हालत में मौके पर ही छोड़कर एक गन्ने के खेत में भाग निकला। उसे अस्पताल में भर्ती कराया। जहां कार्बेट टाइगर रिजर्व के उपनिदेशक अमित वर्मा व रामनगर वन प्रभाग की डीएफओ नेहा वर्मा ने घायल के बारे में जानकारी हासिल की।
ब्लाक प्रमुख संजय नेगी के सूचना देने पर वन विभाग का अमला घटनास्थल सेमलखलिया पहुंचा तो कानियां चौराहे पर एकत्रित ग्रामीणों ने दो घटे तक जाम लगाए रखा। बच्चों की छुट्टी होने पर परेशानी को देखते हुए जाम हटा।
वन विभाग ने घटनास्थल वाले क्षेत्र को दो किमी की परिधि में पूरी तरह से घेराबंदी करते हुये हाथियों से बाघ की तलाश में गश्त शुरु कर दी है। जो समाचार लिखे जाने तक जारी है।
आज होगा वन अधिकारी का घेराव
ईको सेंसिटिव जोन विरोधी संघर्ष समिति की हुई बैठक में ग्राम सेमलखलिया में तेंदुए के हमले में घायल महिला के मामले में वन विभाग को जिम्मेदार ठहराया गया है। समिति ने क्षेत्र में घूम रहे बाघ व तेंदुए को शीघ्र मारे जाने की मांग की है। उन्होंने बाघ के नहीं मारे जाने पर मंगलवार को वन अधिकारियों का घेराव करने की चेतावनी दी है।