देश की एक चौथाई आबादी आज भी अशिक्षित है। सर्वेक्षण बताते हैं कि विश्वविद्यालयों से उत्तीर्ण तीन चौथाई स्नातकों की शिक्षा रोजगार परक नहीं है। देश में उच्च शिक्षा में दाखिला लेने वालों का अनुपात यानी ग्रास एनरोलमेंट रेशियो (जीईआर) उन्नत देशों की तुलना में बहुत कम लगभग 20 प्रतिशत है। मुक्त एवं दूरस्थ शिक्षा को बढ़ावा देकर 30 प्रतिशत के राष्ट्रीय लक्ष्य तक पहुंचा जा सकता है।
राज्यपाल डा. केके पाल ने सोमवार को दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए उक्त बात कही। राज्यपाल एवं उच्च शिक्षा मंत्री ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम की शुरूआत की। राज्यपाल ने कहा कि पूर्व राष्ट्रपति स्वर्गीय डा. एपीजे अब्दुल कलाम ने कहा था कि ‘शिक्षा का लक्ष्य तभी पूरा होता है, जब विद्यार्थी सोचने लगे कि मैं समाज और देश के लिए क्या कर सकता हूं’।
कहा कि जीवन में शिक्षा का महत्व कभी कम नहीं होता है। शिक्षा एक अंतहीन यात्रा के समान है। अच्छी पुस्तकें पढ़ने की आदत लगातार बनाए रखनी चाहिए। डा. पाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले दिनों राष्ट्रीय कौशल विकास मिशन का उद्घाटन किया था।
उच्च शिक्षा से वंचित रहने वाले बच्चों के भीतर छिपे कौशल को विकसित करने का मकसद होना चाहिए। कहा कि विश्वविद्यालय की शिक्षक बिरादरी मुक्त और दूरस्थ शिक्षा को सिर्फ पत्राचार की शिक्षा न बनने दें। सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी का प्रयोग अधिक से अधिक होना चाहिए। उच्च शिक्षा मंत्री डा. इंदिरा हृदयेश ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रदेश में शिक्षा और संस्कार का संवाहक बने।
उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय में आईटी अकादमी बनाने की दिशा में काम शुरू हो गया है। प्रदेश में विद्यार्थियों और शिक्षकों के लिए ई पोर्टल बन गया है। पोर्टल में चार हजार से ज्यादा लोग खुद को पंजीकृत कर चुके हैं।
उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. नागेश्वर राव ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रगति यात्रा के 11वें वर्ष में चल रहा है। कहा कि 2014-15 में उत्तीर्ण 5,431 स्नातकों, परास्नातकों और स्नातकोत्तर डिप्लोमा धारियों में 520 को उपाधियों से सम्मानित किया जा रहा है।
उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय के प्रथम दीक्षांत समारोह में टापरों को स्वर्ण पदक दिए गए। विश्वविद्यालय की दस वर्षों में छात्र संख्या 35 हजार के पार पहुंच गई है। वर्ष 2010 से अब तक कुल छह हजार दो सौ चौंतीस छात्रों को कुल 28 करोड़ 62 लाख रुपये स्टाइपेंड के रूप में मारुति उद्योग, टाटा मोटर्स, टीवीएस, अशोक लीलैंड समेत अन्य कंपनियों ने दिया है।
आठ क्षेत्रीय केंद्रों और 237 अध्ययन केंद्रों के जरिए विश्वविद्यालय ने प्रदेश में अपनी उपस्थिति दर्ज की है। कहा कि विश्वविद्यालय में अंग्रेजी की छात्रा इस वर्ष भी उत्तराखंड में श्रेष्ठ छात्रों में चुनी गई है। इस दौरान कुलसचिव प्रो. आरसी मिश्रा, प्रो. डीएस पठानिया, प्रो. वेदप्रकाश शास्त्री, प्रो. गोविंद सिंह, प्रो. एचपी शुक्ल, प्रो. दुर्गेश पंत, प्रो. पीडी पंत, प्रवींद्र रौतेला, ललित जोशी आदि थे।
डिग्री पाकर वयोवृद्ध गदगद
दीक्षांत समारोह में सेवानिवृत्त के बाद शिक्षा प्राप्त कर छह लोगों ने भी डिग्री प्राप्त की। जिसमें सर्वाधिक उम्र की दिल्ली निवासी 66 वर्षीय विमला शर्मा हैं। शर्मा ने योगा एवं नैचुरलपैथी में डिग्री प्राप्त की। शर्मा ने कहा कि परिवार एवं लोगों की सेवा में पढ़ाई काम आएगी।
इनको मिला गोल्ड मेडल
नेहा चौधरी, ममता शर्मा, पूजा, अनिता पाण्डा, विनोद कुमार, उर्वी कौशिक, प्रभाकर कठायत, अफशा खान, प्राची शर्मा, रश्मि उपाध्याय, विजेंद्र सिंह, अजीत सिंह तोमर, परिमुक्ता को राज्यपाल डा. केके पॉल ने स्वर्ण पदक प्रदान किया गया। जबकि शगुफ्ता परवनी, आकांक्षा श्रीवास्तव, प्रतिभा जोशी, श्रद्धांजलि, विक्रम रावत, मोनिका और पंकज महर को भी स्वर्ण पदक दिया जाना है।