हल्द्वानी। लिवर पाचन और विषैले पदार्थ को निष्क्रिय कर ऊर्जा संचय का काम करता है। कुमाऊं में प्रत्येक पांच में से तीन लोग पेट और लिवर की समस्या से जूझ रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार समय पर ध्यान न देने के कारण अधिकतर लोग हेपेटाइटिस ए और ई की चपेट में आ रहे हैं।
विशेषज्ञ डॉक्टरों के मुताबिक हेपेटाइटिस बीमारी में शुरुआती समय में लक्षण नहीं दिखते है। गंभीर अवस्था में आंखें और पेशाब पीला हो जाना, भूख कम होना, मितली, उल्टी, थकावट और खून की उल्टियां हो सकती हैं। इस कारण नियमित चेकअप कराना जरूरी है ताकि बीमारी का समय पर पता चल सके। नजदीकी लैब में जाकर ब्लड टेस्ट कराएं जिससे हेपेटाइटिस बी और सी वायरस की जांच हो सकती है। यदि प्लेटलेट्स कम हों या एसजीओटी-एसजीपीटी बढ़े मिले तो तुरंत सोनोग्राफी कराकर उचित इलाज शुरू करें। हेपेटाइटिस बी का टीका लगवाएं, बीपी, डायबिटीज, कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल में रखें। वरिष्ठ गैस्ट्रोसर्जन डॉ. विजय मित्तल ने बताया कि कुमाऊं भर से हर रोज 15 से 20 मरीज अस्पताल में पेट और लिवर की समस्या लेकर पहुंच रहे हैं।
लिवर से संबंधित बीमारी एक्यूट बीमारियां- इसमें लिवर में तेजी से सूजन होती है जो गंदे पानी या दूषित खाने से होती है। इससे हेपेटाइटिस ए और ई होता है। लक्षणों की जल्दी पहचान हो जाती है तो इलाज समय पर हो जाता है। एसटीएच में मेडिसिन विभाग के हेड डॉ. सुभाष जोशी के अनुसार बरसात के मौसम में पेट और लिवर संक्रमण का खतरा ज्यादा रहता है। अधिकतर बीमारी मुंह से जाने वाली हैं। इनमें हेपेटाइटिस ए और ई मुख्य है। संक्रमित मरीज से यह फैलती भी है। समय पर इलाज नहीं कराया तो लिवर खराब हो जाता है। पीलिया बिगड़ने पर लिवर ट्रांसप्लांट की भी जरूरत पड़ जाती है।
क्रॉनिक बीमारियां- ये धीरे-धीरे नुकसान पहुंचाती हैं, जैसे क्रॉनिक हेपेटाइटिस बी एवं सी, जो दूषित खून से होती हैं।
ये करें उपाय
संतुलित आहार, नियमित व्यायाम। साफ पानी और सामान्य खाना। दूषित या बाहर का भोजन करने से बचें। हाथ धोकर ही भोजन ग्रहण करें। रोज 30 मिनट तेज चलें, योग करें। हरी सब्जियां, फल और फाइबर युक्त आहार लें। तला-भुना, मिठाई और फास्ट फूड से बचें। बिना डॉक्टर की सलाह के दवा न लें।