प्रथम अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश तथा विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण योगेश कुमार गुप्ता की अदालत ने कोटाबाग स्यात गांव के रिश्वत के आरोपी पटवारी को साढ़े तीन साल के सश्रम कारावास और 40 हजार रुपये जुर्माना अदा करने की सजा सुनाई है।
बता दें कि पांच नवंबर 2010 को अनिल खोचड़ ने एसपी विजिलेंस को सूचना दी थी कि उन्होंने कोटाबाग ब्लाक के स्यात गांव में जमीन खरीदी। दाखिल खारिज के लिए रिपोर्ट लगाने के नाम पर पट्टी पटवारी अनिल आर्या द्वारा 10 हजार रुपये की मांगे जा रहे हैं। विजिलेंस टीम ने गोपनीय जांच के बाद सात नवंबर को उप निदेशक कृषि उत्पादन मंडी के अधिकारियों की मौजूदगी में ट्रैक टीम का गठन कर आरोपी पटवारी को रिश्वत लेते रंगे हाथों धर दबोचा।
अदालत में चल रहे वाद के दौरान वादी अनिल की मृत्यु हो गई। अभियोजन पक्ष की ओर से संयुक्त निदेशक अभियोजन सोहन चंद्र पांडे ने वादी के बेटे नितिन के माध्यम से वाद जारी रखा। न्यायालय में चली सुनवाई में आठ गवाह पेश किए गए। 18 मई सोमवार को कोर्ट में आरोपी को 7/3 भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम का दोषी पाते हुए उस पर दोष सिद्ध किया था।
अब मंगलवार को अदालत ने फैसला सुनाते हुए आरोपी पटवारी पर 7/3 की दोनों धाराओं के तहत एक में एक साल का सश्रम कारावास, 20 हजार रुपये जुर्माना और साढ़े तीन साल का सश्रम कारावास और 20 हजार रुपया जुर्माना अदा करने का फैसला सुनाया। दोनों धाराओं में सजा साथ-साथ चलेगी।