पांच मलिन बस्तियों पर प्रशासन की टेड़ी नजर
रेलवे भूमि और वन विभाग में बसे होने का हवाला दिया, अब सिर्फ 17 मलिन बस्तियों का होगा सर्वे
नगर आयुक्त ने एक दिन सर्वे रुकवाया, नगर आयुक्त ने बनाई तीन टीमें, टीम में रेलवे भी शामिल
अमर उजाला एक्सक्लूसिव
हरीश पांडे
हल्द्वानी। मलिन बस्तियों में रहने वाले लोगों को मालिकाना हक दिलाए जाने की कवायद के क्रम में अब सिर्फ 17 मलिन बस्तियों का सर्वे होगा। रेलवे अतिक्रमण की जद में आ रही पांच मलिन बस्तियों को छोड़कर अब नगर निगम 17 मलिन बस्तियों का सर्वें करेगा। नगर आयुक्त ने एक दिन के लिए सर्वे को रोकते हुए पांच मलिन बस्तियों को सर्वे से हटा दिया है। अब मंगलवार से सर्वे करने के आदेश जारी कर 17 मई तक रिपोर्ट देने को कहा है।
सचिव शहरी आवास ने प्र्रदेश की मलिन बस्तियों में रहने वाले लोगों को मालिकाना हक देने के लिए सभी जिलाधिकारियों और नगर निकायों के अधिकारियों को सर्वे कराकर उसकी रिपोर्ट शासन को भेजने के आदेश दिए थे। इसके बाद नगर आयुक्त पंकज उपाध्याय ने नगर निगम हल्द्वानी की 22 मलिन बस्तियों का सर्वें 18 अप्रैल से शुरू करने के आदेश दिए थे। 18 अप्रैल से सर्वे होना था। इसके लिए नगर आयुक्त ने तीन टीमें बनाई थी। टीम में वन विभाग, रेलवे, सिंचाई, राजस्व और नगर निगम को शामिल किया गया था। इन टीमों को 12 मई 2022 तक सर्वे पूरा कर 17 मई को डीएम को रिपोर्ट सौंपनी थी लेकिन सर्वे शुरू होने से पहले नगर आयुक्त पंकज उपाध्याय ने तुरंत इस पर रोक लगाते हुए नए आदेश जारी कर दिए। इस आदेश में रेलवे के अतिक्रमण की जद में आ रही पांच बस्तियों के सर्वे पर रोक लगा दी है।
सर्वे से इन मलिन बस्तियों को हटाया गया
ढोलक/गफूर बस्ती, इंदिरानगर पश्चिमी ए, इंदिरानगर पश्चिमी बी, इंदिरानगर पूर्वी, चिराग अली साह
अब इन मलिन बस्तियां का होगा सर्वे
अंबेडकर नगर, गांधीनगर, मुनगली गार्डन, गुसाई नगर, वेलेजली लॉज, वाराहा छप्पर, कुल्यालपुरा, राजेंद्रनगर ए, राजेंद्रनगर बी, देवलढूंगा काठगोदाम, बदरीपुरा काठगोदाम बी, बद्रीपुरा काठगोदाम सी, नई बस्ती ए, नई बस्ती बी, जवाहर नगर ए, जवाहर नगर बी।
ऐसे होना है सर्वें
श्रेणी एक
ऐसी बस्तियां वर्गीकृत की जा सकती हैं, जिनमें आवास-निवास योग्य हो और भू स्वामित्व अधिकार निर्धारित मानकों के अनुसार प्रदान किया जा सके।
श्रेणी दो
भूगर्भीय, भौगोलिक, पर्यावरणीय दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्र में अव्यस्थित निवासों के ऐसे भू-भाग को वर्गीकृत किया जाना है, जिसमें कुछ सुरक्षा उपाय अपनाकर निवास योग्य बनाया जा सके।
श्रेणी तीन
ऐसी भूमि पर अवस्थित आवासों को वर्गीकृत किया जा सकता है, जहां भू-स्वामित्व अधिकार प्रदान किया जाना विधिक, सुरक्षा एवं स्वास्थ्य, मानव निवास के दृष्टिकोण उपयुक्त न हो। ऐसे स्थानों से बस्तियोें को किसी दूसरे स्थान पर स्थानांतरित किया जाना उचित होगा।
कोट-
शासन ने तीन श्रेणी निर्धारित की हैं। इसके हिसाब से ही सर्वे होना है। रेलवे भूमि और वन विभाग में बसी बस्तियों का नियमितीकरण नहीं किया जाएगा।
-धीराज गर्ब्याल, डीएम
विधायक सुमित हृदयेश ने लगाया जानबूझकर हटाने का आरोप
हल्द्वानी। हल्द्वानी विधायक सुमित हृदयेश ने कहा कि मलिन बस्तियों के सुधार, विनियमितिकरण, पुर्नवासन, पुर्नव्यवस्थापन नियामावली 2016 में साफ लिखा है कि सभी मलिन बस्तियों का सर्वे कराया जाएगा। सर्वे में मलिन बस्तियों की जमीन किसी एजेंसी की पाई जाती है तो राज्य सरकार इन मलिन बस्तियों को दूसरी जगह पुनर्स्थापित करेगी। अभी तक हाईकोर्ट का फैसला भी नहीं आया है और प्रशासन राजनीतिक दबाव में इन बस्तियों को सर्वे से हटा रहा है। इसका विरोध किया जाएगा।