15 साल तक पंतनगर विवि के पास रही जमीन
2005 में राज्य सरकार ने संस्थान को पंतनगर के जीबी पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय को सौंपकर जैव प्रौद्योगिक संस्थान के रूप में बदल दिया गया। 15 साल तक यह संस्थान पंतनगर विवि के पास रहा लेकिन कोई महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल न हो सकी। 2019 में कुमाऊं विवि के तत्कालीन कुलपति प्रो. केएस राणा ने इस जगह को विवि को देने की मांग उठाई लेकिन 2020 में उत्तराखंड शासन ने इसे उत्तराखंड जैव प्रौद्योगिकी परिषद हल्दी को सौंप दिया। अब भी वर्तमान कुलपति प्रो. डीएस रावत इसे विवि को दिलाने के लिए जोर-शोर से प्रयासरत हैं।
धामी के प्रयास से मिली थी एचएमटी की भूमि
2020 में काठगोदाम के पास रानीबाग स्थित एचएमटी की 45.33 एकड़ विकसित भूमि और भवन केंद्र से प्रदेश सरकार को मिला था। सीएम धामी ने प्रधानमंत्री मोदी और तत्कालीन केंद्रीय भारी उद्योग मंत्री महेंद्र नाथ पांडेय से एचएमटी की भूमि को प्रदेश सरकार को हस्तांतरित करने का अनुरोध किया था। इसके बाद भारत सरकार ने एचएमटी की यह भूमि उत्तराखंड सरकार को 72 करोड़ की राशि में सौंप दी थी। पहले यह परिसर 91 एकड़ में था जिसमें 45.33 एकड़ फैक्ट्री की खरीदी हुई भूमि थी। शेष भूमि राज्य सरकार व वन विभाग की थी जो वापस हो चुकी है।
कभी उत्तराखंड की शान थी एचएमटी, यहां नौकरी करना था स्टेटस सिंबल
वर्ष 1985 में तत्कालीन भारी उद्योग मंत्री एनडी तिवारी के प्रयासों से स्थापित एचएमटी फैक्टरी कभी उत्तराखंड की शान थी। तब यह 91 एकड़ में फैली थी। एक समय इस फैक्ट्री में 500 से अधिक मशीनें थीं। सालाना 500 करोड़ का टर्नओवर था और 20 लाख घड़ियां प्रतिवर्ष बनती थीं लेकिन कंपीटिशन और डिजिटल तकनीक का चलन बढ़ने के बाद 2016 में यह बंद हो गई और रखरखाव के अभाव में फैक्टरी और यहां बनी आवासीय कॉलोनियां खंडहर हो गईं। 2016 में कंपनी बंदी के समय 512 कर्मचारी कार्यरत थे। कुछ ने वीआरएस लिया और कुछ को अन्यत्र समायोजित कर दिया गया।